
मोदी सरकार ने बदल दिया मनरेगा का नाम, क्या मिली नई पहचान; फायदे भी बढ़े
मनरेगा योजना (MGNREGA) का मोदी सरकार ने नाम बदल दिया है। अब यह योजना पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना के नाम से जानी जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को नाम बदलने और काम के दिनों की संख्या बढ़ाने वाले बिल को मंजूरी दे दी।
मोदी सरकार ने शुक्रवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट-मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदल दिया है। अब यह योजना पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना के नाम से जानी जाएगी। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को नाम बदलने और काम के दिनों की संख्या बढ़ाने वाले बिल को मंजूरी दे दी।
इस योजना के तहत मिलने वाले फायदे को भी सरकार ने बढ़ा दिया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, नाम बदलने के साथ-साथ इसके तहत काम के दिनों की संख्या मौजूदा 100 दिनों से बढ़ाकर अब 125 दिन कर दी गई है। यानी कि अब सालभर में 100 दिनों के बजाए 125 दिनों के रोजगार की गारंटी होगी।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, जिसे MGNREGA या मनरेगा के नाम से जाना जाता रहा है, सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसका मकसद ग्रामीण इलाकों में परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर उस परिवार को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीड रोजगार दिया जाता है। अब इसे सवा सौ दिन कर दिया गया है।
यह योजना यूपीए-1 सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक रही है। इसे साल 2005 में शुरू किया गया था। अभी इस स्कीम के तहत 15 करोड़ से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं। लाभार्थियों में से लगभग एक-तिहाई महिलाएं हैं। मनमोहन सिंह सरकार में शुरू की गई इस योजना का शुरुआती नाम नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट था, 2009 में महात्मा गांधी के नाम पर रख दिया गया।

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Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।
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