
रेप के आरोपी को मोबाइल चैट ने बचा लिया; HC ने किस दलील पर तुरंत दी रिलीफ
संक्षेप: HC ने युवक के खिलाफ डेटिंग ऐप बंबल पर मिली महिला द्वारा दर्ज रेप के मामले को रद्द कर दिया है। बंबल पर मुलाकात के बाद होटल में सेक्स, जब दर्द हुआ तो थाने पहुंची महिला.. जानिए क्या है पूरा मामला।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 23 वर्षीय युवक पर दर्ज बलात्कार का मामला रद्द कर दिया है। यह मामला एक महिला की शिकायत पर दर्ज किया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि उसने होटल में सेक्स संबंध के दौरान अपनी सहमति वापस ले ली थी, लेकिन युवक ने उसकी इच्छा के खिलाफ जाकर संबंध बनाए। हालांकि कोर्ट ने इस बात को नहीं माना।

यह आदेश जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने पारित किया, जिन्होंने यह पाया कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच संबंध पूरी तरह से सहमति पर आधारित थे। अदालत ने कहा कि दोनों के बीच बातचीत और चैट से यह स्पष्ट होता है कि यह रिश्ता आपसी इच्छा से बना था।
अदालत ने क्या कहा
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, “चैट्स भले ही शालीन न हों, लेकिन वे यह दर्शाती हैं कि याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता के बीच जो कुछ हुआ, वह आपसी सहमति से हुआ। ऐसी परिस्थिति में मकदमे को आगे बढ़ाना न्याय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।” उन्होंने आगे कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि सहमति से बने संबंधों को हर स्थिति में बलात्कार नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा, “यदि इस तरह के मामलों में मुकदमा चलने दिया गया, तो यह केवल न्याय की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने वाला ‘औपचारिक अनुष्ठान’ बन जाएगा।”
मामला क्या था
यह मामला सम्प्रास एंथनी नामक युवक से जुड़ा है, जो महिला से लगभग एक साल पहले बंबल ऐप के माध्यम से मिला था। दोनों के बीच इंस्टाग्राम पर लगातार मैसेजेस और तस्वीरों का आदान-प्रदान होता रहा। महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने 11 अगस्त को आमने-सामने मिलने का फैसला किया। दोनों एक होटल में गए। होटल में लड़के ने लड़की को सेड्यूस करने की कोशिश की। शिकायक के अनुसार, जब युवक ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की, तो उसने तुरंत अपनी सहमति वापस ले ली।
महिला ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद युवक ने उसकी इच्छा के खिलाफ जाकर सेक्स संबंध बनाए। अगले दिन वह उसे घर छोड़ गया। दर्द महसूस होने पर महिला ने अस्पताल का रुख किया और फिर 13 अगस्त को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 के तहत मामला दर्ज किया था।
बचाव पक्ष की दलील
आरोपी के वकील ने अदालत में कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच संबंध पूरी तरह सहमति पर आधारित थे। वकील ने यह भी कहा कि पुलिस ने उन चैट्स को नजरअंदाज किया, जो दोनों के बीच हुई थीं और जो साफ तौर पर संबंध की सहमति को दर्शाती हैं। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि मामला गंभीर है और आरोपी को अदालत में ट्रायल के जरिए अपनी बेगुनाही साबित करनी चाहिए।
अदालत का निष्कर्ष
सभी तथ्यों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों को देखते हुए, हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला “आपसी सहमति से बने संबंध का” है और इसमें बलात्कार का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने कहा कि “आपसी इच्छा से बना संबंध, भले ही बाद में किसी कारणवश टूट जाए, उसे आपराधिक कृत्य नहीं कहा जा सकता।” इसके साथ ही, अदालत ने आरोपी के खिलाफ दर्ज रेप केस को रद्द करते हुए उसे राहत दी।





