अब मंत्री-विधायक नहीं ले सकेंगे बागवानी की सब्सिडी, सरकारी कर्मचारी भी दायरे से बाहर

हिन्दुस्तान टीम
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बागवानी को लेकर सब्सिडी के नियम अब बेहद कड़े कर दिए गए हैं। अब मंत्री-विधायक, स्वायत्त और स्थानीय निकायों के पदाधिकारी और सरकारी कर्मचारी बागवानी की सब्सिडी नहीं ले सकेंगे।

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सरकारी कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों को भी नहीं मिलेगी सब्सिडी

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) से व्यापारिक बागवानी और कोल्ड स्टोरेज योजना से जुड़े पात्रता नियम सख्त कर दिए हैं। संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, मंत्रियों, सांसदों-विधायकों, मेयरों और जिला पंचायत अध्यक्षों को बोर्ड की योजनाओं के तहत मिलने वाली सब्सिडी के दायरे से बाहर कर दिया गया है।

ज्यादा पारदर्शी बनेगी योजना

एनएचबी ने 21 अगस्त को तत्काल लागू होने वाले संशोधित दिशानिर्देश जारी किए, जिनकी जानकारी सोमवार को सावर्जनिक हुई है। बोर्ड ने कहा कि इस संशोधन का मकसद आर्थिक मदद को तर्कसंगत बनाना, फायदों का समान वितरण सुनिश्चित करना, सब्सिडी के दोहराव को रोकना और योजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाना है।

सरकारी कर्मचारी भी योजना से बाहर

निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अलावा बोर्ड ने मंत्रालयों, सरकारी विभागों में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों को भी योजनाओं के दायरे से बाहर किया है। हालांकि, संशोधन में कहा गया है कि नए नियम के बाद अयोग्य करार दी गई श्रेणियों में आने वाले लोगों के परिवार के सदस्य अब भी एक बार की मदद ले सकते हैं। इसके लिए उनका योजना के तहत परिवार की संशोधित परिभाषा के दायरे में आना अनिवार्य है। इसके अलावा 10 हजार या उससे अधिक पेंशन पाने वाले रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों को भी सब्सिडी नहीं मिलेगी।

परिवार के एक ही सदस्य को मिलेगा लाभ

संशोधित नियमों के तहत, किसी परिवार के एक ही सदस्य को योजनाओं के तहत सब्सिडी का लाभ मिलेगा। दिशानिर्देश के अनुसार, परिवार के किसी भी सदस्य को मिली आर्थिक मदद पूरे परिवार द्वारा ली गई आर्थिक मदद मानी जाएगी। चाहे वह व्यक्तिगत रूप से हो या हिंदू अविभाजित परिवार, साझेदारी या प्रोप्राइटरशिप फर्म के जरिए या किसी कंपनी के डायरेक्टर के तौर पर। अगर परिवार के किसी एक सदस्य ने सब्सिडी ले ली है तो फिर भविष्य में कोई भी दूसरा सदस्य पात्र नहीं होगा।

राज्य मंत्री, सांसद और सचिव चर्चाओं में रहे

हाल में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, भाजपा सांसद लुंबाराम और केंद्रीय सचिव नरेश पाल गंगवार के मामले चर्चाओं में रहे थे। दरअसल, एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि राज्य मंत्री चौधरी ने एनएचबी से खीरे की खेती के लिए 99 लाख रुपये की सब्सिडी हासिल की थी।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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