मेरा सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं... पुष्पा स्टाइल में काकोली घोष ने भरी हुंकार, बोलीं- दीदी की ममता से नहीं पहुंची संसद
काकोली घोष दस्तीदार पश्चिम बंगाल की एक प्रमुख भारतीय राजनेता, चिकित्सक और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ सांसद हैं। वह वर्तमान में पश्चिम बंगाल की बारासात लोकसभा सीट से संसद सदस्य हैं।

पश्चिम बंगाल की विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में टूट तय हो चुकी है। बात अब बहुत आगे बढ़ चुकी है। संसदीय दल की टूट का नेतृत्व कर रही सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अब ममता बनर्जी को दो टूक संदेश दिया है कि वह उनकी कृपा पर राजनीति नहीं कर रही थीं। उन्होंने कहा कि वह पिछले 40 साल से संसदीय जीवन में सक्रिय हैं और पार्षद से लेकर सांसद तक रही हैं। पार्टी नेतृत्व के साथ विश्वासघात के एक सवाल पर बारासात सीट से लोकसभा सांसद काकोली घोष ने बिफरते हुए कहा कि बहुत सह लिया, अब और नहीं सह सकते।
समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए काकोली घोष ने कहा, "मेरा सिर कट जाएगा लेकिन झुकेगा नहीं... मैंने बहुत सह लिया... मैं 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां नहीं आई हूं; मैं यहां 40 साल से लड़ रही हूं। और जैसा कि मैंने कहा, ऐसे लोगों की बातों का मुझ पर कोई असर नहीं होता।" पेशे से चिकित्सक घोष ने कहा कि उनके दादा स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके चाचा और जेठ भी राजनीति में रहे हैं। मंत्री रहे हैं और सभी ने सियासी लड़ाइयां लड़ी हैं, इसलिए वह ऐसी लड़ाइयों से नहीं घबराने वाली हैं।
1986 से ममता बनर्जी के साथ
उन्होंने कहा कि वह 1986 से ममता बनर्जी के साथ हैं और वह जानती हैं कि काकोली ने कतनी लड़ाइयां लड़ी हैं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी 2011 में मुख्यमंत्री बनी हैं लेकिन वह उससे बहुत पहले से संसदीय जीवन में रही हैं। काकोली घोष दस्तीदार का यह बयान तब आया है, जब उनके ही नेतृत्व में TMC के करीब दर्जन भर सांसदों ने बंगाल भाजपा प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर जाकर मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि पार्टी के करीब 20 सांसदों ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)का समर्थन करने का फैसला किया है।
ओम बिरला को पत्र लिखा है
उन्होंने कहा कि इस फैसले से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अवगत करा दिया गया है। तृणमूल के लोकसभा में 28 सदस्य हैं जबकि राज्यसभा में उसके 12 सदस्य हैं। काकोली घोष दस्तीदार ने बातचीत में कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत गठबंधन को समर्थन देने की समूह की इच्छा से अवगत कराने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पहले ही पत्र भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा, ''तृणमूल के करीब 20 सांसदों ने जिनमें मैं भी शामिल हूं राजग को समर्थन देने के अपने फैसले से अवगत कराने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है।''
पार्टी की मुख्य सचेतक बनी हुई हैं
काकोली ने दावा किया कि वह लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह निर्णय साथी सांसदों से परामर्श के बाद लिया गया। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर बढ़ते आंतरिक संकट के बीच आया है। तृणमूल में हाल के दिनों में वरिष्ठ नेताओं द्वारा खुले तौर पर असहमति और इस्तीफे देखने को मिले हैं। काकोली ने कहा कि समूह ने राजनीतिक रूप से राजग के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है। उन्होंने दलील दी कि यह जनता के जनादेश को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ''हमने जनता के फैसले को स्वीकार कर लिया है और हमारा मानना है कि हमारा भविष्य का राजनीतिक मार्ग राजग के अनुरूप होना चाहिए।''
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लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


