
द्रौपदी मुसलमान नहीं थी, फिर भी उनके कपड़े उतारे गए; गिरिराज सिंह के बयान पर महबूबा मुफ्ती
गिरिराज सिंह ने कहा, ‘कोई नियुक्ति पत्र लेने जा रहा है, तो क्या उसे अपना चेहरा नहीं दिखाना चाहिए? क्या यह कोई इस्लामिक देश है? नीतीश कुमार ने अभिभावक की भूमिका निभाई। आप पासपोर्ट बनवाने जाते हैं, तो क्या चेहरा नहीं दिखाते?
महिला डॉक्टर का नकाब हटाने को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विवादों के घेरे में हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नीतीश के इस बर्ताव का बचाव किया, जिसे लेकर विपक्ष उन पर हमलावर है। पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को कहा, 'यह सेक्युलर कंट्री है। यह गांधी का देश है जिसने अपनी जान सेक्युलरिज्म के लिए कुर्बान कर दी।' उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि गिरिराज सिंह जैसे जो बीजेपी के नेता हैं, वे यहां पर राम राज्य नहीं, बल्कि कौरव राज्य बनाना चाहते हैं, जिसमें कौरवों ने द्रौपदी के भरी महफिल में कपड़े उतारे थे। महबूबा ने कहा, 'मुझे लगता है कि गिरिराज की मानसिकता कौरवों वाली है। जहां पर औरतों की कोई इज्जत नहीं है क्योंकि द्रौपदी तो मुसलमान नहीं थी। उसने नकाब नहीं पहना था। इसके बावजूद, उनके कपड़े उतारे गए और यह कौरव, गिरिराज जैसे लोग तालियां बजा रहे थे, हंस रहे थे।'
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आज भी ये वही काम कर रहे हैं। इसमें हैरान होने की क्या बात है। PDP चीफ ने कहा, 'हमें तो उनसे कोई उम्मीद नहीं है। मगर, नीतीश कुमार को ऐसा नहीं करना चाहिए था। मुझे खुशी है कि आज इल्तिजा गई और उनके खिलाफ FIR दर्ज किया गया।' दरअसल, पीडीपी की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने महिला चिकित्सक का नकाब हटाने के मामले में नीतीश कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए शुक्रवार को पुलिस में शिकायत दी। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा, ‘मैं आपका ध्यान एक घृणित घटना की ओर आकर्षित करना चाहती हूं, जिसने मुसलमानों, विशेषकर महिलाओं को अत्यधिक पीड़ा और दुख पहुंचाया है। कुछ दिनों पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक सरकारी कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से एक युवा मुस्लिम चिकित्सक का नकाब हटा दिया। इस मामले को और भी बदतर बनाने वाली बात आसपास के लोगों की असहज प्रतिक्रिया थी, जिसमें उपमुख्यमंत्री भी शामिल थे, जो खिलखिलाकर हंस रहे थे।’
गिरिराज सिंह के किस बयान पर भड़का विपक्ष
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बचाव करते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि यह महिला पर निर्भर है कि वह सरकारी नौकरी को ठुकरा दे या जहन्नुम में जाए। उन्होंने तर्क दिया, ‘अगर कोई नियुक्ति पत्र लेने जा रहा है, तो क्या उसे अपना चेहरा नहीं दिखाना चाहिए? क्या यह कोई इस्लामिक देश है? नीतीश कुमार ने अभिभावक की भूमिका निभाई। अगर आप पासपोर्ट बनवाने जाते हैं, तो क्या आप अपना चेहरा नहीं दिखाते? जब आप हवाई अड्डा जाते हैं, तो क्या अपना चेहरा नहीं दिखाते? लोग पाकिस्तान और इंग्लिशस्तान की बातें करते हैं, लेकिन यह भारत है। भारत में कानून का राज है। नीतीश कुमार ने सही किया।' महिला की ओर से इस घटना के बाद नौकरी स्वीकार करने से इनकार किए जाने की खबरों पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘वो इनकार करे, या जहन्नुम में जाए। ये उसकी मर्जी है।’





