पाकिस्तान की हाथ काटने वाली धमकी पर भारत ने लगाई लताड़, सिंधु जल संधि पर बता दिया रुख
विदेश मंत्रालय ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की तरफ से दी जा रही धमकियों पर सीधा जवाब दिया है। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार का रुख इस मुद्दे को लेकर स्पष्ट है। यह संधि पाकिस्तान की तरफ से जारी आतंकवाद की वजह से रुकी हुई है।

MEA responds to Pakistan on IWT: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को खत्म कर दिया था। पाकिस्तान की तरफ से इस मुद्दे को लेकर लगातार भारत को धमकियां दी जा रही हैं। शुक्रवार को इन्हीं धमकियों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर भारत का रुख हमेशा एक जैसा है। उन्होंने कहा कि यह संधि पाकिस्तान की तरफ से जारी आतंकवाद की वजह से रुकी हुई है।
शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "सिंधु जल संधि पर भारत का रुख साफ और स्थिर है। पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने के कारण IWT (सिंधु जल संधि) अभी रुकी हुई है। पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन भरोसेमंद और पक्के तौर पर छोड़ना होगा।" बता दें, इस संधि के तहत भारत, पाकिस्तान को काफी ज्यादा मात्रा में पानी देता था। पाकिस्तान की कृषि का एक बड़ा हिस्सा इसी संधि के तहत पाकिस्तान जाने वाले पानी पर केंद्रित है। ऐसे में अब जब संधि खत्म हो गई है, तो आर्थिक रूप से डूब रहे पाकिस्तान को चिंता सताने लगी है।
पाकिस्तान की तरफ से जारी है धमकियों का दौर
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारत ने सिंधु जल संधि को खत्म करने का ऐलान किया, तो पाकिस्तान की तरफ से धमकियों का एक दौर शुरू हो गया। बिलावल भुट्टो ने भारत को धमकी देते हुए कहा था कि अगर सिंधु में पानी नहीं बहा, तो खून बहाया जाएगा। हाल ही में शहबाज सरकार के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इस जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ जहर उगला था। उन्होंने कहा था उनकी सरकार इस मुद्दे पर भारत के साथ लड़ाई भी कर सकती है। इसके अलावा पाकिस्तान के जलवायु मंत्री ने भी भारत को हाथ काटने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा, “पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के हाथ में एक नल का नियंत्रण है। उनका कहना है कि वह पाकिस्तान की ओर पानी की एक बूंद भी नहीं बहने देंगे। इस्लामाबाद उस हाथ को काट देगा, जो सिंधु नदी के पानी को रोकने की कोशिश करेगा।” मलिक का यह बयान पाकिस्तानी मीडिया में काफी दिनों तक वायरल रहा था।
क्या है सिंधु जल संधि?
भारत और पाकिस्तान के बीच में विश्व बैंक की मध्यस्थता में ऐतिहासिक सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960 को हुई थी। इस संधि में कुल 6 नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था। पूर्व की रावी, व्यास और सतलुज नदी के पानी का ज्यादातर हिस्सा भारत को मिला था, जबकि सिंधु, क्षेलम और चिनाब नदी के पानी का अधिकांश हिस्सा पाकिस्तान को उपयोग के लिए दिया जाना था। इस संधि से ज्यादातर पानी पाकिस्तान के हिस्से में चला जाता था। 1960 में हुई इस संधि के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कई संघर्ष हुए, लेकिन यह संधि सामान्य रूप से चलती रही। हालांकि 2014 के बाद केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद इस संधि को रोकने की चर्चा शुरू हो गई। क्योंकि पंजाब और जम्मू-कश्मीर में पानी की कमी दिखाई देने लगी थी। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने इस संधि को रद्द कर दिया। इसके बाद से पाकिस्तान की तरफ से लगातार धमकियां दी जा रही हैं।


