ना भांगड़ा, ना पंजाब का दौरा... भारत दौरे पर ट्रूडो वाली गलती नहीं करेंगे कनाडाई पीएम मार्क कार्नी
कनाडाई नेता मार्क कार्नी का भारत दौरा: जस्टिन ट्रूडो की गलतियों से सबक लेते हुए कार्नी ने पंजाब और भांगड़ा से दूरी बनाई है। जानिए कैसे सुधरेंगे भारत-कनाडा के बीच तनावपूर्ण रिश्ते और क्या है इस कूटनीतिक दौरे का असल मकसद।

कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मार्क कार्नी की आगामी भारत यात्रा के दौरान कोई भांगड़ा डांस नहीं होगा और पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के विपरीत, वह पंजाब का दौरा भी नहीं करेंगे। कार्नी शुक्रवार यानी आज अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर मुंबई पहुंच रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य कनाडा और भारत के बीच तनावपूर्ण रहे संबंधों को फिर से पटरी पर लाना और नए वैश्विक गठबंधनों की तलाश करना है।
ट्रूडो के 2018 के दौरे से ली गई सीख
साल 2018 में भारत दौरे पर आए पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का अत्यधिक भड़कीले और पारंपरिक भारतीय परिधान पहनने को लेकर काफी मज़ाक उड़ाया गया था। इसके साथ ही, कनाडा में सक्रिय खालिस्तानियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त करने के लिए ट्रूडो की सार्वजनिक तौर पर आलोचना भी की थी।
क्यों बिगड़े थे दोनों देशों के रिश्ते?
दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में तब खटास आ गई थी, जब ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि एक प्रमुख खालिस्तानियों आतंकी हरदीप निज्जर की हत्या में भारत सरकार का हाथ हो सकता है। भारत ने इन दावों को हमेशा सिरे से खारिज किया है।
पंजाब दौरे से दूरी और रणनीतिक कदम
कई पूर्व कनाडाई नेताओं के उलट कार्नी पंजाब जाने से बचेंगे। कनाडा में पंजाब मूल के प्रवासियों की एक बहुत बड़ी आबादी है और अलग राज्य की मांग करने वाले सिख अलगाववादियों के कारण यह दौरा राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता था।
कार्नी के इस रुख की कनाडा के कुछ सिख समूहों ने आलोचना भी की है। 'वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन ऑफ कनाडा' का कहना है कि उनकी सरकार भारत को जवाबदेह ठहराने या सिख-कनाडाई लोगों को विदेशी हस्तक्षेप से बचाने में विफल रही है।
वहीं, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने स्पष्ट किया है कि कनाडा और भारत ने भारत से जुड़ी संभावित आपराधिक गतिविधियों को लेकर उच्च स्तरीय बातचीत की है। संदिग्ध धन, डिजिटल खतरों और प्रवासी समुदायों की निगरानी को ट्रैक करने के लिए नए सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।
भारत के बाद के कार्यक्रम
भारत का दौरा पूरा करने के बाद मार्क कार्नी ऑस्ट्रेलिया जाएंगे, जहां वे वहां की संसद को संबोधित करेंगे और रक्षा, सैन्य व व्यापारिक संबंधों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद ओटावा लौटने पर, वे जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची से मुलाकात करेंगे, जिसमें ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के व्यापार पर चर्चा होगी।
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