डोनाल्ड ट्रंप को जिसने समर्पित किया था अपना नोबेल, उस महिला नेता को भी मिला 'धोखा'

Jan 07, 2026 10:12 am ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, काराकास
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डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मेरा मानना है कि उनके लिए वेनेजुएला के हालात संभालना बहुत कठिन होगा। देश में उनके लिए इतना समर्थन नहीं है और ना ही बहुत ज्यादा सम्मान है। वह बहुत अच्छी महिला हैं, लेकिन वेनेजुएला के अंदर उनका उतना सम्मान नहीं है।' ट्रंप के रुख से मचाडो को करारा झटका लगा है।

डोनाल्ड ट्रंप को जिसने समर्पित किया था अपना नोबेल, उस महिला नेता को भी मिला 'धोखा'

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपने सम्मान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित किया था। उनका कहना था कि इसके वास्तविक हकदार डोनाल्ड ट्रंप हैं और इसलिए मैं अपना सम्मान उन्हें समर्पित करती हूं। वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को लेकर माना जा रहा था कि निकोलस मादुरो को अमेरिका की ओर से अगवा किए जाने के बाद अब नेतृत्व उनके हाथ आएगा। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से उन्हें भी झटका ही लगा है। डोनाल्ड ट्रंप ने मादुरो के बाद उन्हें नेतृत्व दिए जाने की अटकलों को खारिज कर दिया और कहा कि वे वेनेजुएला के हालात संभाल नहीं सकतीं।

आधी रात को जब अमेरिका की स्पेशल फोर्सेज ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठा ले गए तो सभी का यही कहना था कि शायद अब मारिया कोरिना मचाडो को सत्ता मिलेगी। लेकिन ऐसी उम्मीदें जल्दी ही खत्म हो गईं। इस संबंध में सवाल पूछा गया तो खुद डोनाल्ड ट्रंप ने ही ऐसी अटकलों को खारिज कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मेरा मानना है कि उनके लिए वेनेजुएला के हालात संभालना बहुत कठिन होगा। देश में उनके लिए इतना समर्थन नहीं है और ना ही बहुत ज्यादा सम्मान है। वह बहुत अच्छी महिला हैं, लेकिन वेनेजुएला के अंदर उनका उतना सम्मान नहीं है।'

राष्ट्रपति चुनाव लड़ना चाहती थीं मचाडो

58 साल की मारिया कोरिना मचाडो बीते दो दशकों से निकोलस मादुरो की सबसे बड़ी आलोचक रही हैं। वह 2023 में ही नेता विपक्ष का चुनाव जीती थीं। वह 2024 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया था। अंत में उनकी ओर से एडमुंडो गोंजालेज का समर्थन किया गया था। गोंजालेज इस चुनाव में हार गए थे, जो एक 74 साल के रिटायर्ड डिप्लोमैट हैं। इस चुनाव में निकोलस मादुरो ही जीते और इस तरह उनका सत्ता पर कब्जा बना रहा था। हालांकि विपक्ष की ओर से आरोप लगाए गए कि चुनाव में धांधली हुई है और हम इस इलेक्शन रिजल्ट को चुनौती देंगे।

अक्टूबर में मिला था मचाडो को नोबेल, अब लगा करारा झटका

मचाडो को बीते साल अक्तूबर में नोबेल पुरस्कार मिला था। उन्हें वेनेजुएला में तानाशाही शासन के बीच लोकतंत्र को जिंदा रखने की उम्मीद के नाम पर यह सम्मान दिया गया था। इस सम्मान को मचाडो ने डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित कर दिया था। कई सालों से मचाडो खुलकर डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करती रही हैं। लेकिन अब जब वेनेजुएला में नेतृत्व का मौका आया तो डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें भी करारा झटका दिया है। इसे मचाडो के समर्थक निश्चित तौर पर एक धोखे की तरह देख रहे होंगे।

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