अब मराठी बोलने वाले पर टूट पड़े लोग, मुंबई बना अखाड़ा; ड्राइवरों का बवाल
महाराष्ट्र में ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के बाद मुंबई अखाड़ा बन गया है। खबर है कि हाल ही में एक ड्राइवर पर हमले के बाद यहां स्थानीय और उत्तर भारतीयों के बीच तनाव पैदा हो गया है।

मुंबई के कांदिवली इलाके में सोमवार को मराठी बोलने वाले एक ऑटो चालक द्वारा भाषा की जानकारी से जुड़े नियम के विरोध में हो रहे प्रदर्शन में शामिल होने से इनकार करने पर चार ऑटो चालकों ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की। इस घटना के बाद स्थानीय मराठी भाषी लोगों और उत्तर भारत से आए चालकों के बीच तनाव पैदा हो गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने दोपहर में उपनगरीय कांदिवली में प्रकाश शेजवाल पर कथित तौर पर हमला करने के आरोप में सुरेश यादव, महेंद्र यादव, अनिल कुमार यादव और नूरुल अंसारी को गिरफ्तार किया। अधिकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब बड़ी संख्या में ऑटो-रिक्शा चालक राज्य सरकार के मराठी को कामकाजी भाषा के रूप में लागू करने के अभियान के विरोध में एमजी रोड पर एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारी अन्य ऑटो चालकों से भी अपने वाहन नहीं चलाने की अपील कर रहे थे।
किस बात पर हुए थे नाराज
अधिकारी ने बताया कि शेजवाल अपनी ऑटो-रिक्शा में यात्रियों को ले जाते रहे, जिससे कुछ प्रदर्शनकारी नाराज हो गए और उन्होंने उसे अपशब्द कहे, जबकि चार आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है।
इस बीच अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को पूरे महाराष्ट्र के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों ने 331 ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को नोटिस जारी किए, जिनमें से मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के 139 चालक भी शामिल हैं। इन चालकों को मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान न होने के कारण नोटिस दिया गया।
चालक कर रहे हैं प्रदर्शन
मुंबई के कुछ इलाकों में आम लोगों को सोमवार को मराठी भाषा की जानकारी से जुड़े राज्य सरकार के अभियान का विरोध कर रहे कुछ ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों की कथित गुंडागर्दी का सामना करना पड़ा। उपनगरीय कांदिवली, मलाड (पश्चिम), सांताक्रूज, दहिसर, अंधेरी और कुछ अन्य स्थानों पर प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए।
कांदिवली (पश्चिम) के लालजीपाड़ा में वाहन चालकों ने सुबह करीब नौ बजे व्यस्त समय के दौरान सड़क पर रास्ता रोककर प्रदर्शन किया। पुलिसकर्मियों की एक टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया। कुछ समय बाद स्थिति सामान्य हो गई। एक समूह ने ऐप के जरिए चलने वाली टैक्सियों के चालकों समेत ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों को यात्रियों को ले जाने से रोका।
उन्होंने कथित तौर पर कुछ चालकों को यात्रियों को वाहनों से नीचे उतारने के लिए मजबूर किया। कुछ चालकों ने यह भी शिकायत की कि प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। अरविंद राव नामक व्यक्ति ने लिखा, 'ऑटोरिक्शा चालक जबरन यात्रियों को ऑटोरिक्शा से उतार रहे हैं।'
यूनियन में उथल पुथल
ऑटोरिक्शा और टैक्सी यूनियन के एक नेता ने विरोध प्रदर्शन के लिए मराठी नहीं बोल पाने वाले कुछ चालकों में फैली घबराहट को जिम्मेदार बताया। यूनियन नेता ने कहा कि उन्हें अपनी रोजी-रोटी खोने का डर है। उन्होंने कहा कि ऐसे चालकों ने प्रदर्शन करने और दूसरे चालकों को यात्रियों को ले जाने से रोकने की कोशिश की।
यूनियन नेता ने कहा, 'किसी भी यूनियन ने हड़ताल या आंदोलन का आह्वान नहीं किया है।' उन्होंने कहा कि पश्चिमी उपनगरों में अलग-अलग जगहों पर कुछ चालकों ने प्रदर्शन किया, जिनमें मराठी नहीं बोलने वाले चालकों की संख्या काफी है।


