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कभी खौफ का पर्याय, अब ममता की मूरत... सरेंडर के बाद मां बनी माओवादी; दिलचस्प कहानी

कभी खौफ का पर्याय, अब ममता की मूरत... सरेंडर के बाद मां बनी माओवादी; दिलचस्प कहानी

संक्षेप:

कल तक माओवाद की दुनिया में कुख्यात सम्मी की आंखें आंसुओं से भरी हुई हैं। यह खुशी के आंसू हैं। सम्मी को वह हासिल हुआ है, जिसकी कल्पना उसने इस जिंदगी में नहीं की थी। असल में सम्मी को बेटा पैदा हुआ है।

Nov 24, 2025 07:46 am ISTDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नागपुर
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कल तक माओवाद की दुनिया में कुख्यात सम्मी की आंखें आंसुओं से भरी हुई हैं। यह खुशी के आंसू हैं। सम्मी को वह हासिल हुआ है, जिसकी कल्पना उसने इस जिंदगी में नहीं की थी। असल में सम्मी को बेटा पैदा हुआ है। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली स्थित जिला महिला अस्पताल में सम्मी अपने बेटे को गोद में लिए बैठी हुई है। 10 महीने पहले तक वह हाथों में बंदूक लिए घायल नक्सलियों को दवाएं उपलब्ध कराती थी। अब उसके हाथों में उसका सपना है। सम्मी अबूझमाड़ के माओवादी हेडक्वॉर्टर में कामरेड बंदी रही है। सम्मी और उसके पति अर्जुन ने इसी साल एक जनवरी को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने सरेंडर किया था।

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क्यों मुश्किल था संतान पैदा करना
सम्मी जहां ट्रेंड एरिया कमेटी मेंबर थी, वहीं गुरिल्ला मेडिकल टीम की सदस्य भी थी। सम्मी का पति अर्जुन पूर्व पीएलजीए कमांडर और कुख्यात माओवादी भूपति का बॉडीगार्ड रहा है। दोनों ने लगातार हिंसा से उकताकर जंगल छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इन दोनों का मां-पिता बनना इसलिए भी खास है क्योंकि माओवादियों के लिए अक्सर यह मुमकिन नहीं होता। असल में माओवादियों का ऑपरेशन कर दिया जाता है, ताकि वह बच्चे न पैदा कर सकें। लेकिन अर्जुन को इससे छूट मिल गई थी। यही वजह रही कि वह पिता बनने में सफल रहा।

इसलिए लगाई जाती है रोक
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सम्मी ने फरवरी में कंसीव किया था। उन्होंने बताया कि आमतौर पर माओवादी कैडर्स को पिता बनने के लिए दोबारा ऑपरेशन कराना पड़ता है। क्योंकि उनके लिए बर्थ कंट्रोल सर्जरी अनिवार्य होती है। हालांकि सर्जरी के बाद भी कपल को दूर रखा जाता है ताकि उनका ध्यान आंदोलन से भटकने न पाए। अस्पताल में मिलने पहुंचे डॉक्टर से सम्मी ने कहा कि पहले हमें सिर्फ यह पता था कि कहां छिपना है। हम शादी या बच्चों के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। लेकिन आज मेरे पास वो सब है, जिसके बारे में मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।

Deepak Mishra

लेखक के बारे में

Deepak Mishra
दीपक मिश्र मीडिया इंडस्ट्री में करीब 17 साल का अनुभव रखते हैं। खेल, सिनेमा और राजनीति पर प्रमुखता से काम किया है। खासतौर पर खेल की खबरों से जुनून की हद तक मोहब्बत है। 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप और 2014 में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप प्रमुखता से कवर कर चुके हैं। फोटोग्राफी और मोबाइल वीडियो स्टोरी के साथ-साथ पॉडकास्ट में विशेष रुचि रखते हैं। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट के साथ काम करते हुए कई वीडियो स्टोरीज पर काम किया। इसी दौरान आईपीएल पर पॉडकास्ट के साथ एक अन्य पॉडकास्ट ‘शहर का किस्सा’ भी कर चुके हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद आज अखबार के साथ पत्रकारिता की शुरुआत हुई। इसके बाद दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट और पत्रिका अखबार में काम किया है। आई नेक्स्ट की डिजिटल विंग में काम करते हुए कई नए और रोचक प्रयोग किए। लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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