ऐसे बहुत आए और गए... बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों के ISRO छोड़ने पर क्या बोले केंद्रीय मंत्री
पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ भी अब एक निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप (Agnikul Cosmos) से जुड़ चुके हैं । इस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आश्वस्त किया कि किसी व्यक्ति के जाने से गगनयान जैसे मिशन नहीं रुकते।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान-3 और गगनयान जैसे अहम अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के बड़ी संख्या में इस्तीफा देने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे प्रशासनिक जरूरत बताया है। लगे हाथ उन्होंने यह भी कहा कि वैसे-वैसे कई लोग आए और गए लेकिन इसरो की कार्यक्षमता और उसके महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ISRO एक बहुत बड़ा कार्यबल है और यहाँ "कई आते हैं और कई जाते हैं," इसलिए इसमें किसी विवाद की गुंजाइश नहीं है।
इस बीच, ISRO ने अपने महत्वपूर्ण मिशनों, विशेष रूप से 'गगनयान' की सफलता सुनिश्चित करने के लिए अपने वैज्ञानिकों के संस्थान छोड़ने के नियमों को कड़ा कर दिया है। ISRO द्वारा जारी एक नए निर्देश के अनुसार, अब ग्रुप 'A' के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के आवेदनों को सामान्य रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा। बता दें कि गगनयान और चंद्रयान-3 से जुड़े करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS)ले लिया था। इसके बाद 14 जुलाई को ISRO ने एक आंतरिक मेमो जारी कर ऐसे इस्तीफों या VRS के नियम कड़े कर दिए हैं।
'कई आए, कई गए हैं'
जब केंद्रीय मंत्री से ISRO के मेमो के बारे में पूछा गया तो सिंह ने कहा कि यह प्रशासनिक कारणों से जारी किया गया है, न कि किसी और वजह से। विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने पत्रकारों से कहा, "नहीं, यह प्रशासनिक कारणों से है ताकि फ़ैसला ज़्यादा परिपक्व स्तर पर लिया जा सके।" उन्होंने कहा कि ISRO में बहुत बड़ी वर्कफ़ोर्स है; जैसे-जैसे लोग छोड़ते हैं, कई लोग जुड़ते भी हैं। उन्होंने कहा, “कई आए हैं, कई गए हैं।”
समीक्षा की क्या जरूरत
जब उनसे देश के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र (कडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट- KKNPP) में डेटा की सेंधमारी और साइबर अटैक पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि KKNPP को लेकर हो रही सारी चर्चाएं गलत हैं क्योंकि असल में उस रणनीतिक सुविधा से उस सेंधमारी का कोई लेना-देना नहीं है, और सवाल उठाया कि जब कुछ हुआ ही नहीं तो समीक्षा की क्या जरूरत है।
ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. सोमनाथ छोड़ गए
बता दें कि ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. सोमनाथ एस चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप 'अग्निकुल कॉसमॉस' के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में ऑब्ज़र्वर के तौर पर शामिल हुए हैं। उन्होंने जनवरी 2025 तक ISRO चेयरमैन के तौर पर काम किया था और कई अहम मिशनों की देखरेख की थी। जिन मिशनों को उन्होंने देखा था उनमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग और भारत की पहली सोलर ऑब्ज़र्वेटरी 'आदित्य-L1' की लॉन्चिंग भी शामिल है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जितेंद्र सिंह ने आश्वस्त किया कि किसी व्यक्ति के जाने से गगनयान जैसे मिशन नहीं रुकते। उन्होंने कहा कि ISRO में कार्य संस्कृति ऐसी है कि वहाँ सेवानिवृत्त वैज्ञानिक भी परियोजनाओं का हिस्सा बने रहते हैं और काम निरंतरता में चलता रहता है।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


