पहले 10 घर जले... अगले ही दिन 25 और फूंके! मणिपुर के कांगपोकपी में क्या हो रहा है?

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ताजा आगजनी टिपोराम गांव में हुई। गांव के एक निवासी के मुताबिक, जलाए गए 25 घरों में से 5 घर नेपाली समुदाय के लोगों के थे। घटना के बाद आग लगाने वाले लोग वहां से चले गए।

Manipur Violence
मणिपुर में पुलिस कर्मियों ने हड़ताल के दौरान प्रदर्शनकारियों के इंफाल-जिरिबाम रोड (एनएच-37) पर जलाए गए टायरों को हटाया।

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में बुधवार को कम से कम 25 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, यह घटना इंफाल-तामेंगलॉन्ग रोड के पास एक दिन पहले हुई आगजनी के बाद सामने आई है।

ताजा आगजनी टिपोराम गांव में हुई। गांव के एक निवासी के मुताबिक, जलाए गए 25 घरों में से 5 घर नेपाली समुदाय के लोगों के थे। घटना के बाद आग लगाने वाले लोग वहां से चले गए।

एक दिन पहले ही 10 घरों को लगाई थी आग

इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी इसी इलाके में 10 घरों में आग लगा दी गई थी। आगजनी के दौरान एक ग्रामीण को गोली लगी थी। पुलिस के मुताबिक, एक एक्सकेवेटर, जिप्सी, पिकअप और ट्रक को भी नुकसान पहुंचा।

घायल व्यक्ति की पहचान 49 वर्षीय एन लुइथुइबोउ के रूप में हुई है। उन्हें पेट के दाहिने हिस्से और हाथ में गोली लगी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह गांव के चर्च में पादरी हैं।

पुलिस के अनुसार, सोमवार को तेइखांग कुकी गांव पर हथियारबंद लोगों ने हमला किया था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। इनमें दो महिलाएं शामिल थीं। चार अन्य लोग घायल हुए थे। इसके बाद इलाके में काफी देर तक गोलीबारी भी हुई।

गांव लौटने पर फिर हुई गोलीबारी

हिंसा के बाद टिपोराम के ग्रामीणों को करीब 15 किलोमीटर दूर मकुई में सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था। ग्रामीण मंगलवार को वापस गांव लौटे थे, लेकिन आरोप है कि लौटने के बाद उन पर फिर गोलीबारी की गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि घरों में आग लगाए जाने की जानकारी सुरक्षा बलों को दे दी गई थी, लेकिन बुधवार तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। सुरक्षा बलों और प्रशासन की ओर से भी अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

2023 से हिंसा की आग में झुलसा है मणिपुर

मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा ने राज्य के लगभग सभी समुदायों को प्रभावित किया है। अब तक कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 60 हजार लोग विस्थापित हुए हैं।

मैतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहता है, जबकि कुकी-जो समुदाय का बड़ा हिस्सा पहाड़ी इलाकों में रहता है। दोनों समुदायों के बीच लंबे समय से तनाव और अलगाव बना हुआ है।

फरवरी में राज्य में नई सरकार बनी थी। इसमें तीनों प्रमुख समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया, ताकि राज्य में जातीय संतुलन बनाए रखने और शांति की कोशिश की जा सके।

Shubham Sharma

लेखक के बारे में

Shubham Sharma
शुभम शर्मा साल 2017 से पत्रकारिता और मीडिया जगत में काम कर रहे हैं। टीवी में इनपुट असाइनमेंट से शुरुआत करते हुए डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक का अनुभव। TV9 भारतवर्ष और मनीकंट्रोल हिंदी (Network 18) जैसे बड़े संस्थानों के बाद अब लाइव हिंदुस्तान में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर खबरों को आप तक पहुंचाने के काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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