मणिपुर में 40 हजार लोगों की 'घर वापसी' की तैयारी! काकचिंग में बंद हुए 9 रिलीफ कैंप
मणिपुर के काकचिंग जिले में 9 राहत शिविरों को बंद कर विस्थापितों (IDPs) का स्थायी घरों में पुनर्वास शुरू कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य 40,000 लोगों को बसाना है। पूरी खबर पढ़ें।

मणिपुर के काकचिंग जिले से राहत भरी खबर सामने आ रही है। अधिकारियों ने आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) के पुनर्वास के लिए सरकार के प्रयासों के तहत मंगलवार को नौ राहत शिविरों को बंद कर दिया है। इन शिविरों में रह रहे लोगों को अब उनके स्थायी घरों में भेज दिया गया है।
पुनर्वास प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति
शुरुआत में, अधिकारियों ने जिले के सभी 11 राहत शिविरों को बंद करने का आदेश जारी किया था, जहां लगभग 750 लोग शरण लिए हुए थे। हालांकि, पूरी तरह से लोगों का शिफ्ट होना अभी बाकी है और वर्तमान में लगभग 200 लोग अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं।
इस प्रक्रिया पर बात करते हुए काकचिंग के नोडल अधिकारी ने कहा कि सभी विस्थापितों को शिफ्ट करना कहना आसान है, लेकिन करना मुश्किल। फिर से बसाना और पुनर्वास एक थकाऊ और जटिल काम है; इसमें कुछ समय लग सकता है। हालांकि, हम इसे जल्द पूरा करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
सरकारी लक्ष्य और अब तक की प्रगति
यह किसी जिला प्राधिकरण द्वारा शुरू किया गया दूसरा सबसे बड़ा पुनर्वास अभियान है। इससे पहले बिष्णुपुर जिले में इसी तरह का कदम उठाया गया था, जहां 257 लोगों को फिर से बसाया गया था। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च तक 10,000 से अधिक विस्थापित परिवारों (लगभग 40,000 व्यक्तियों) का पुनर्वास करना है।
दिसंबर 2025 तक कुल 2,200 परिवारों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया जा चुका था। पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके घरों के पुनर्निर्माण के लिए 'विशेष PMAY-G' (प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण) के तहत लगभग 7,000 घरों को मंजूरी दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन घरों का निर्माण कार्य अभी विभिन्न चरणों में है।
जबरन वसूली के आरोप में 3 उग्रवादी गिरफ्तार
मंगलवार को पुलिस द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, सुरक्षा बलों ने मणिपुर के थौबल और काकचिंग जिलों से जबरन वसूली गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में दो प्रतिबंधित संगठनों के तीन उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने बताया कि यह गिरफ्तारियां सोमवार को की गईं। थौबल जिले से 'पीपुल्स लिबरेशन आर्मी' (PLA) के दो सक्रिय कैडरों को गिरफ्तार किया गया। काकचिंग जिले से 'कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी' (पीपुल्स वॉर ग्रुप गुट - KCP-PWG) के एक स्वयंभू सार्जेंट मेजर को पकड़ा गया है।
लेखक के बारे में
Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।
अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
और पढ़ें

