ममता बनर्जी के विधायक पर बंगाल पुलिस ने एक ही दिन में ठोक दीं 6 FIR! हरकत में आया हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक ही दिन में 6 FIR का सामना कर रहे टीएमसी विधायक परेश राम दास को बड़ी राहत दी है। अदालत ने 30 जून तक पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। पूरी खबर पढ़ें।

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक परेश राम दास को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया है कि वह टीएमसी विधायक के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करे। दरअसल, 16 मई को कैनिंग पुलिस स्टेशन में विधायक के खिलाफ एक ही दिन में छह आपराधिक मामले (FIR) दर्ज किए गए थे। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। अदालत की ओर से दी गई यह अंतरिम सुरक्षा केवल इन्हीं 6 एफआईआर तक सीमित रहेगी।
30 जून तक कोई दंडात्मक कदम नहीं, जांच में करना होगा सहयोग
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि 30 जून 2026 तक अदालत की अनुमति के बिना याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया:
- मामलों की जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी।
- विधायक परेश राम दास को जांच एजेंसी के साथ पूरी तरह सहयोग करना होगा।
- अगर विधायक जांच में सहयोग नहीं करते हैं, तो राज्य सरकार इस अंतरिम सुरक्षा को रद्द कराने के लिए अदालत में अपील कर सकती है।
5 मामले साल 2021 के, छठी FIR पर अदालत को संदेह
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा दर्ज मामलों पर कई अहम टिप्पणियां कीं। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि विधायक पर दर्ज 6 मुकदमों में से 5 मामले साल 2021 की घटनाओं से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही, अदालत ने छठे मामले की सत्यता पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा, "प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि शिकायत के नीचे याचिकाकर्ता का नाम एक अलग तरीके से लिखा गया था। चूंकि जांच अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए अदालत इससे ज्यादा कोई टिप्पणी नहीं कर रही है।"
अदालत में किसने क्या दी दलील?
अदालत में टीएमसी विधायक का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट किशोर दत्ता ने दलील दी कि ये एफआईआर पश्चिम बंगाल में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से दर्ज की गई हैं। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि इनमें से ज्यादातर शिकायतें 2021 की हैं।
वहीं, राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) राजदीप मजूमदार ने इसका विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि एफआईआर में जघन्य अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि, दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने विधायक परेश राम दास को छह एफआईआर में अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी, लेकिन यह भी साफ किया कि यह सुरक्षा अनिश्चित काल के लिए नहीं है।
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