कल्याण बनर्जी की नाराजगी पर बोले कीर्ति आजाद- ममता दीदी सब ठीक कर देंगी
कीर्ति आजाद ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी नाराज जरूर हैं लेकिन वह पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं। ममता बनर्जी जल्द ही अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी के बीच के इस विवाद को सुलझा लेंगी।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मचे घमासान के बीच सांसद कल्याण बनर्जी के पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, इन अटकलों को टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि कल्याण बनर्जी की नाराजगी जायज है, लेकिन वह पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं। आजाद ने भरोसा जताया है कि ममता बनर्जी (दीदी) खुद इस विवाद को सुलझा लेंगी।
'कल्याण फाइटर हैं, दीदी सब ठीक कर देंगी'
टीएमसी के मौजूदा संकट के बीच सांसद कीर्ति आजाद ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि दोनों नेताओं के बीच जल्द सुलह हो जाएगी। उन्होंने लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी को एक 'फाइटर' बताते हुए कहा, "कल्याण बनर्जी शुरू से लेकर आज तक दीदी के साथ रहे हैं। वह कहीं नहीं जाएंगे। वह एक भावुक इंसान हैं और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने दीदी का नाम लिया है, वह (ममता) उनसे बात करेंगी और सब कुछ ठीक हो जाएगा।"
क्यों नाराज हैं कल्याण बनर्जी?
दरअसल, गुरुवार को अपना अल्टीमेटम सार्वजनिक करते हुए कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े सभी केस से हटने का ऐलान किया था। उनका आरोप है कि उन्हें बिना बताए एक मामले में नई रिट याचिका दायर कर दी गई और उनकी जगह किसी दूसरे वकील को केस सौंप दिया गया। इस पर कीर्ति आजाद ने भी माना कि कल्याण की नाराजगी जायज और सही है। उन्होंने कहा, "टीएमसी को उन्हें बताना चाहिए था कि केस कोई और देखेगा। आखिरी समय पर जानकारी देना सही नहीं था... लेकिन दीदी सब चीजें ठीक कर देंगी।"
अभिषेक बनर्जी पर लगाया 'अहंकार' का आरोप
कल्याण बनर्जी ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने अभिषेक को 'अहंकारी' बताते हुए कहा कि वह सबको अपने से नीचा समझते हैं। ममता बनर्जी के सामने स्पष्ट संदेश देते हुए कल्याण ने साफ कहा कि वह अभी भी दीदी के साथ हैं, लेकिन भतीजे का अहंकार बर्दाश्त नहीं करेंगे। बकौल कल्याण, "मैंने रात भर जागकर केस तैयार किया। मैं हर जगह जा रहा हूं, जोखिम उठा रहा हूं और अपना काम कर रहा हूं। फिर भी उनके अपमान करने की आदत नहीं बदली है।" कलकत्ता हाईकोर्ट में बागी विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर के मामले में अभिषेक की याचिका पर सुनवाई के ठीक बाद कल्याण ने कहा कि अगर ममता अभिषेक को चुनती हैं, तो वह अपना रास्ता खुद तय करेंगे।
टीएमसी में गहराता जा रहा है संकट
पिछले महीने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही टीएमसी लगातार झटकों का सामना कर रही है। पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने बगावत कर दी है। इन बागी विधायकों ने अभिषेक बनर्जी को अपना नेता मानने से इनकार कर दिया है, हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी से उनके सलाहकार बने रहने की गुजारिश की है। निष्कासित नेता रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में इन बागियों ने अपना रुख साफ किया है और उन्हें (रितब्रत) नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है।
सांसदों के भी आ रहे इस्तीफे
इस बगावत के बाद इसी हफ्ते टीएमसी सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक ने भी पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। लोकसभा में भी एक अलग गुट सामने आया है, जहां काकोली घोष ने 19 सांसदों के समर्थन का दावा करते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की बात कही है।
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Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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