बागियों को मनाने में जुटीं ममता, खुद कर रहीं विधायकों से बात; हाई कोर्ट जाएगी TMC
ममता बनर्जी पार्टी को संभालने के लिए दो रास्ते अपना रही हैं। एक तो वह बागी विधायकों को समझाने-बुझाने में जुटी हैं। दूसरी तरफ सदन में स्पीकर के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रही हैं।

महाराष्ट्र में शिवसेना की ही तरह अब बंगाल में टीएमसी में भी असली पार्टी साबित करने की जंग शुरू हो गई है। इस स्थिति का जिम्मेदार बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को बताया जा रहा है। उन्होंने ही सबसे पहले फर्जी हस्ताक्षर को लेकर विधानसभा सचिवालय में शिकायत की थी। इसके बाद उन्हें ही सदन में विपक्ष का नेता चुन लिया गया। उनका दावा है कि पार्टी के 80 में से 60 विधायकों का समर्थन उनके पास है। हालांकि ममता बनर्जी का समर्थन करने वाला गुट भी शांत नहीं बैठा है।
बागियों को मनाएंगी ममता बनर्जी
पार्टी को संभालने के लिए ममता बनर्जी टू वे अप्रोच लेकर चल रही हैं। एक तरफ वह बागी विधायकों को मनाने में जुटी हैं तो दूसरी तरफ सदन में स्पीकर के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रही हैं। ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के खिलाफ वह कानूनी जंग लड़ने को तैयार हैं। इसके अलावा ममता बनर्जी बागियों को अपने साथ मिलाने के लिए बातचीत कर रही हैं।
टीएमसी के एक सीनियर नेता का कहना है कि यह नीति काम भी कर रही है। टीएमसी के सीनियर विधायक शोभन देव चटर्जी ने कहा कि जो लोग ऋतब्रत बनर्जी के साथ चले गए थे वे भी अब ममता बनर्जी को फोन कर रहे हैं। वे खुद ममता बनर्जी के गुट में लौटने की रिक्वेस्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा स्पीकर के सामने बागियों की जो लिस्ट पेश की है वह फर्जी है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, मैंने अपने 80 विधायकों को फोन किया। ज्यादातर ने फोन उठाया। मैं आपको बता दूं कि 30 विधायक हमारे साथ हैं। ऋतब्रत बनर्जी ने जो लिस्ट सौंपी है उसको लेकर जांच होनी चाहिए। हमें यह भी शक है कि उनमें से बहुत सारे लोगों के फर्जी साइन किए गए हैं।
ऋतब्रत के खेमे में भी पड़ी फूट
ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में फूट पड़ना ममता बनर्जी के लिए अच्छी खबर है। दरअसल ऋतब्रत का समर्थन करने वाले एक विधायक ने कहा कि वह ममता बनर्जी के लिए सलाहकार की भूमिका को स्वीकार नहीं कर सकते। वहीं ऋतब्रत का कहना है कि ममता बनर्जी को ममता बनर्जी को उनके गुट की सलाहकार बन जाना चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो उनका इशारा ममता बनर्जी के रिटायरमेंट की तरफ है।
ऋतब्रत के गुट में शामिल विधायक गुलशन मलिक ने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंे कहा कि ममता बनर्जी ही हमारी नेता हैं। किसी भी परिस्थिति में उनकी गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। वहीं ऋतब्रत का कहना है कि उनके गुट में और भी विधायक शामिल होना चाहते हैं। ऋतब्रत ने कहा, बस थोड़ा इंतजार करिए और फिर देखिए कि हमारी संख्या कितनी होती है। बुधवार को ऋतब्रत ने 58 विधायकों की लिस्ट स्पीकर को दी थी। हालांकि सबके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए थे।
अकेली नहीं हैं ममता बनर्जी
ममता बनर्जी भी कोई अकेली नहीं पड़ी है। ज्यादातर सीनियर नेता उनके ही समर्थन में हैं। शुक्रवार को कालीघाट में उनके आवास पर बुलाई गई बैठक में कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम, अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, आसिमा पात्रा, मदन मित्रा, चंद्रिमा भट्टाचार्य, कुणाल घोष, मौजूद थे। इसके अलावा 80 में से 8 विधायक भी इस बैठक में पहुंचे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि विरोध ममता बनर्जी का नहीं बल्कि अभिषेक बनर्जी का था। फिर भी टीएमसी में उनका कद बरकरार है।
चंद्रिमा भट्टाचार्य को बंगाल में टीएमसी चीफ नियुक्त किया गया है। इसके अलावा माला रॉय को महिला टीएमसी का चीफ बनाया गया है। कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि टीएमसी के 20 सांसद भी बीजेपी के संपर्क में हैं और वे पाला बदल सकते हैं।
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लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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