यह कैसी सरकार, यह कैसा लोकतंत्र; प्रदर्शनकारियों पर ऐक्शन को लेकर दिल्ली पुलिस पर बरसीं ममता
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को नीट के प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक होने के मामले को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए केंद्र सरकार पर संवाद के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को नीट के प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक होने के मामले को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए केंद्र सरकार पर संवाद के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया। संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन सोमवार को संसद मार्ग के निकट कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के हजारों समर्थकों ने ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान कथित तौर पर अवरोधक तोड़ने के प्रयास किये, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
पुलिसिया बर्बरता की निंदा
पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री बनर्जी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में प्रदर्शन से निपटने के सरकार के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने कहाकि मैं आज दिल्ली में हमारे युवाओं और छात्रों पर की गई पुलिस की बर्बरता की कड़ी निंदा करती हूं। ममता बनर्जी ने सवाल किया कि यह कैसी सरकार है जो अपने ही छात्रों से डरती है? यह कैसा लोकतंत्र है जो बातचीत के बजाय सवालों का जवाब लाठी और आंसू गैस से देता है? बनर्जी ने कहा कि असहमति जताना लोकतांत्रिक अधिकार है और देश इसके छात्रों, किसानों, महिलाओं, श्रमिकों और हर नागरिक का है। उन्होंने कहाकि असहमति अपराध नहीं है। बर्बरता शासन नहीं हो सकती।
शहीद दिवस रैली पर पाबंदी का आरोप
ममता बनर्जी ने साथ ही आरोप लगाया कि 21 जुलाई को कोलकाता में होने वाली सालाना ‘शहीद दिवस’ रैली से पहले उनकी पार्टी के धड़े को बैठकें और जुलूस निकालने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद समर्थक इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने मध्य कोलकाता के बिड़ला तारामंडल इलाके में तैयारियों का जायजा लेने के बाद यह दावा किया। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उनके गुट को वहां रैली करने की अनुमति मिली है। बनर्जी ने पत्रकारों से कहाकि हमारी सभाओं और जुलूसों की इजाजत नहीं दी जा रही है। दूर-दराज के जिलों से आने वाले कार्यकर्ताओं को ठहरने की जगह तक नहीं मिल रही है। फिर भी, वे स्नेह के कारण आ रहे हैं।
वांगचुक की पत्नी के साथ धक्का-मुक्की का आरोप
उधर कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को आरोप लगाया कि उसके ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र घायल हो गए और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। जंतर-मंतर पर मंच हटाए जाने के बाद कॉजपा ने केरल हाउस के निकट धरना जारी रखा। सीजेपी के ये आरोप उस समय सामने आए जब संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने तितर-बितर कर दिया और प्रदर्शन स्थल को खाली करा दिया।
सीजेपी बोली-आंदोलन जारी रहेगा
शाम तक सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका, सौरव दास और गीतांजलि अंगमो केरल हाउस के निकट धरने पर बैठे रहे। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बेहद क्रूरता दिखाई। यहां प्रदर्शन कर रहे कई छात्रों के सिर फट गए। यहां तक कि 15-वर्षीय एक लड़की को भी एक पुरुष पुलिसकर्मी ने बेरहमी से पीटा। एक पुरुष पुलिसकर्मी ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो के बाल पकड़ने की भी कोशिश की। उन्हें लाठी से मारने और वाहन से घसीटकर बाहर निकालने का भी प्रयास किया गया।


