6 मई की बैठक में ममता ने क्या कहा, भड़क गए TMC के कई विधायक; बगावत की इनसाइड स्टोरी

Himanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
share

ममता बनर्जी ने 6 मई को एक बैठक बुलाई। इसमें उपस्थित सभी विधायकों से हार के बावजूद अपने भतीजे और पार्टी के नंबर-2 नेता अभिषेक बनर्जी के सम्मान में खड़े होकर स्टैंडिंग ओवेशन देने को कहा।

6 मई की बैठक में ममता ने क्या कहा, भड़क गए TMC के कई विधायक; बगावत की इनसाइड स्टोरी

Mamata Banerjee and TMC Crisis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में 41% वोट हासिल करने के बावजूद सत्ता से बाहर हुई तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपनी वजूद बचाने के लिए जूझ रही है। चुनावों में मिली हार के ठीक एक महीने बाद पार्टी के भीतर मची यह उठापटक अब पूरी तरह से एक संगठित विद्रोह का रूप ले चुकी है। पार्टी के 80 में से 58 विधायकों के बागी गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया है और विधानसभा अध्यक्ष ने भी उन्हें मान्यता दे दी है। आपको बता दें कि पार्टी के भीतर असंतोष के सुर 4 मई को चुनाव परिणाम के सामने आने के साथ ही उठने लगे थे, लेकिन इसकी औपचारिक शुरुआत 6 मई को ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक में हुई।

ममता बनर्जी ने 6 मई को एक बैठक बुलाई। इसमें उपस्थित सभी विधायकों से हार के बावजूद अपने भतीजे और पार्टी के नंबर-2 नेता अभिषेक बनर्जी के सम्मान में खड़े होकर स्टैंडिंग ओवेशन देने को कहा। कई वरिष्ठ विधायकों ने खड़े होने से इनकार कर दिया, जिससे पहली बार नेतृत्व के प्रति गंभीर असहजता दिखाई दी।

जहांगीर खान पर कार्रवाई न होना

अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाने वाले फलता विधानसभा के कद्दावर नेता जहांगीर खान ने पार्टी से सलाह किए बिना पुनर्मतदान से अपना नाम वापस ले लिया था। इस पर जब नेतृत्व से सवाल किया गया तो अभिषेक ने अहंकार से कहा, "पार्टी का ट्वीट देखें।" वहीं, ममता बनर्जी ने भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। इस अहंकार ने बगावत के बीज बो दिए।

दिल्ली दौरा और गुप्त बैठकें

बागी गुट के मुख्य सूत्रधार और उलूबेरिया पूरबा के विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने दिल्ली का दौरा किया, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। कोलकाता लौटने के बाद ऋतब्रत ने विधायकों के हॉस्टल और एक निजी होटल में ताबड़तोड़ बैठकें कर विधायकों को एकजुट करना शुरू किया।

फर्जी हस्ताक्षर विवाद

1 जून 2026 को TMC नेतृत्व ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिए स्पीकर को एक पत्र सौंपा। लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुलासा किया कि ऋतब्रत बनर्जी और एन्टली के विधायक संदीपन साहा ने उनके हस्ताक्षर जाली होने की शिकायत की है। सीआईडी जांच में दो अन्य विधायकों अरूप रॉय और बहारुल इस्लाम ने भी माना कि उन्होंने पत्र पर दस्तखत नहीं किए थे। इस विवाद ने बागी विधायकों को पूरी तरह भड़का दिया।

ममता का पलटवार

TMC ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निष्कासित कर दिया। ममता बनर्जी ने फेसबुक लाइव के जरिए आरोप लगाया कि दिल्ली में उनकी पार्टी को तोड़ने की साजिश रची जा रही है और पुलिस उनके विधायकों को डरा-धमका रही है।

ममता से बैर नहीं, अभिषेक की खैर नहीं

बागी विधायकों का रुख बेहद दिलचस्प है। वे खुलकर कह रहे हैं कि उन्हें ममता बनर्जी के नेतृत्व से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन वे अभिषेक बनर्जी और उनकी चुनावी रणनीति संभालने वाली कंसल्टेंसी फर्म I-PAC की तानाशाही को अब बर्दाश्त नहीं करेंगे। एक बागी वरिष्ठ विधायक ने कहा, "हम अभिषेक बनर्जी के खिलाफ हैं, ममता जी के नेतृत्व से हमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन हम अभिषेक या किसी बाहरी एजेंसी को पार्टी के कामकाज में दखल देने की इजाजत नहीं देंगे। हस्ताक्षर विवाद में उन्होंने वरिष्ठ विधायकों को अपमानित किया है।"

अल्पसंख्यक समुदाय के विधायकों और कुलपी से विधायक बर्नाली धारा जैसे गैर-राजनीतिक चेहरों का कहना है कि वे भाजपा के साथ नहीं जा रहे हैं, लेकिन अपने कार्यकर्ताओं को हो रही राजनीतिक हिंसा से बचाने और प्रशासनिक मदद पाने के लिए उनके पास इस बागी गुट के साथ जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

शिंदे मॉडल दोहराने का दावा

विधानसभा में सरकार और पार्टी को पंगु बनाने के बाद अब बागी गुट की नजर दिल्ली पर है। टीएमसी के एक वरिष्ठ सांसद ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अगले एक सप्ताह के भीतर टीएमसी के संसदीय दल में भी बड़ा विस्फोट हो सकता है। लोकसभा में टीएमसी के 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। बागी गुट का दावा है कि बहुत जल्द दो-तिहाई सांसद भी विद्रोह कर देंगे।

दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई से बचने के लिए आवश्यक संख्या बल जुटते ही दिल्ली में भी बगावत का बिगुल फूंक दिया जाएगा, जिससे संसद में भी अभिषेक बनर्जी बिल्कुल अकेले पड़ जाएंगे। बागी नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र में जिस तरह एकनाथ शिंदे (शिवसेना) और अजित पवार (NCP) ने मूल पार्टी पर कब्जा किया था, ठीक उसी तरह वे भी चुनाव आयोग जाकर टीएमसी के नाम और 'जोड़ा फूल' पर अपना कानूनी दावा ठोकेंगे।

कृपया अपने अनुभव को रेट करें

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

और पढ़ें