4 मई के बाद ममता बनर्जी से मिली, उस दिन...; TMC बागी सांसद शताब्दी राय ने बताई पार्टी छोड़ने की वजह

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ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की बागी सांसद शताब्दी राय ने एक बार फिर से मोर्चा खोला है। उन्होंने ममता बनर्जी की तुलना धृतराष्ट्र से करते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी कई सांसदों के अंदर है, जल्दी ही और भी सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं।

4 मई के बाद ममता बनर्जी से मिली, उस दिन...; TMC बागी सांसद शताब्दी राय ने बताई पार्टी छोड़ने की वजह

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के हालात खराब होते जा रहे हैं। पार्टी के 20 से ज्यादा सांसद, दर्जनों विधायक बागी हो चुके हैं। इतना ही नहीं बागी होने के बाद यह नेता लगातार ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के ऊपर हमला भी बोल रहे हैं। इसी क्रम में 2009 से ममता का साथ देने वाली अभिनेत्री से नेता बनी शताब्दी राय ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने ममता बनर्जी की तुलना धृतराष्ट्र से करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के नेताओं द्वारा लगातार उठाई जा रही चिंताओं पर आंखें मूंद ली थीं।

न्यूज 18 से बात करते हुए चार बार की सांसद शताब्दी राय ने ममता बनर्जी के खिलाफ जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ममता को अब पार्टी से प्यार नहीं रहा है। उन्होंने कहा, "मैं 2009 में तब से तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा हूं, जब यह सत्ता में भी नहीं थी। मैं उस समय से ममता बनर्जी के साथ थीं। इतने वर्षों से में पूरी निष्ठा के साथ पार्टी की सेवा करती रही। लेकिन अब चीजें बदल गई हैं।"

रॉय ने बताया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद वह ममता बनर्जी से मिलने के लिए उनके आवास पर गई थीं, लेकिन ममता ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “4 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद हम सभी सांसद आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए उनके घर पर गए थे। लेकिन ममता बनर्जी जनादेश स्वीकार करने के लिए तैयार ही नहीं थी। ऐसा क्यों? इसके अलावा मेरी कुछ शिकायतें थीं, जिसे सुना ही नहीं गया। इसके बाद यह साफ हो गया कि ममता दी को पार्टी से प्यार नहीं है।” रॉय ने जोर देकर कहा कि उस बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि पार्टी नेतृत्व अब विधायकों और सांसदों की बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।

दीदी बदल गई हैं: शताब्दी राय

तृणमूल कांग्रेस की बागी सांसद शताब्दी राय ने ममता बनर्जी के ऊपर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि पिछले समय में पूर्व सीएम में काफी बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा, "दीदी बदल गई हैं। पिछले कुछ वर्षों में उनमें बहुत बदला हुआ है। पहले मेरा उनके साथ एक भावनात्मक जुड़ाव था, लेकिन अब परिस्थितियां अजीब हो गई हैं। इसके अलावा मेरे लिए काम महत्वपूर्ण है और जब काम नहीं हो पा रहा था तो मैंने यह फैसला (बागी होने का) लिया।"

शताब्दी राय ने जोर देकर कहा कि वह पार्टी छोड़ रही हैं क्योंकि उनकी आवाज नहीं सुनी गई। पहले ममता बनर्जी तक सभी की पहुंच थी लेकिन पिछले कुछ समय में कुछ चुनिंदा लोग ही उन तक पहुंच सकते थे।

अभी और सांसद छोड़ेंगे पार्टी: शताब्दी राय

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के इस्तीफे पर बात करते हुए शताब्दी राय ने कहा कि आने वाले समय में और सांसद भी पार्टी छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा, "तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी नेतृत्व को लेकर जो असंतोष है, वह केवल कुछ नेताओं तक ही सीमित नहीं है। बल्कि बड़े स्तर पर लोग इससे प्रभावित हैं। विधानसभा चुनाव के खराब नतीजों ने इस नाराजगी को और भी ज्यादा बढ़ा दिया। हम चर्चा करना चाहते थे कि नतीजे आखिर इतने खराब कैसे हुए लेकिन हमारी बात ही नहीं सुनी गई। अब सभी का एक ही मत है कि अब इसे और जारी नहीं रखा जा सकता।"

बता दें, तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट का नेतृत्व कर रही कोकाली घोष दास्तीदार ने अपने उप नेता के रूप में शताब्दी राय को नियुक्त किया है। इस मुद्दे पर शताब्दी ने कहा कि वह बागी समूह को औपचारिक मान्यता दिलाने का प्रयास कर रही हैं। एक बार यह हो जाता है इसके बाद गुट एनडीए को समर्थन देना जारी रखेगा।

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Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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