अकेली पड़ीं ममता बनर्जी, बागी गुट में जाने को तैयार बेहद करीबी नेता; TMC सिंबल पर भी खतरा

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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ममता बनर्जी के करीबी अनुब्रत मंडल जल्द रितब्रत बनर्जी के बागी गुट में शामिल हो सकते हैं। बागी विधायकों ने उनसे 30 बार बात होने का दावा किया है। गुट टीएमसी के सिंबल पर दावा ठोकने की तैयारी में है।

Anubrata Mondal, Ritabrata Banerjee

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रही उथल-पुथल के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले बीरभूम के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल अब रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो सकते हैं। शुक्रवार को बागी गुट के विधायकों ने खुद इसके स्पष्ट संकेत दिए हैं।

'4 मई के बाद से 30 बार हो चुकी है बात'

ईएम बाईपास स्थित एक निजी होटल में बागी गुट की राष्ट्रीय कार्य समिति की दो दिवसीय बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक के पहले दिन पत्रकारों से बात करते हुए रितब्रत बनर्जी ने एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा, "4 मई से मेरी अनुब्रत मंडल के साथ कम से कम 30 बार बातचीत हो चुकी है।"

वहीं, एक अन्य बागी विधायक अक्रूज्जमान ने भी सस्पेंस बढ़ाते हुए कहा, "बस एक दिन और इंतजार कीजिए, सब कुछ साफ हो जाएगा।" दूसरी तरफ, जब इस बारे में खुद अनुब्रत मंडल से पूछा गया तो उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देने से साफ इनकार कर दिया।

चुनावी नतीजों के बाद से साधी है खामोशी

ममता बनर्जी के पुराने और भरोसेमंद सहयोगी रहे अनुब्रत मंडल 4 मई को आए नतीजों के बाद से ही अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। उनकी इस खामोशी के बीच बीरभूम के कई प्रमुख विधायक, जिनमें पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा और काजल शेख जैसे बड़े नाम शामिल हैं, पहले ही पाला बदलकर बागी गुट में शामिल हो चुके हैं।

बता दें कि कथित गो-तस्करी मामले में अनुब्रत मंडल ने 25 महीने जेल में बिताए थे, जिसके बाद सितंबर 2024 में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

शनिवार को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी!

बागी गुट के सूत्रों का कहना है कि अनुब्रत मंडल शनिवार को आधिकारिक तौर पर रितब्रत कैंप का हिस्सा बन सकते हैं। चर्चा यह भी है कि गुट में शामिल होने के बाद उन्हें जिला अध्यक्ष पद की अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

पार्टी के नाम और सिंबल पर ठोका जा रहा दावा

इन सियासी हलचलों के बीच, बागी गुट तृणमूल पार्टी के नाम और उसके चुनाव चिह्न (सिंबल) पर अपना दावा ठोकने की पूरी तैयारी कर रहा है। इसके लिए चुनाव आयोग (EC) को भेजे जाने वाले जवाब का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।

बागी गुट में बांटे गए अहम पद

शुक्रवार को बागी गुट ने कई अहम संगठनात्मक फैसले लिए और प्रमुख नियुक्तियों का ऐलान किया:

  • पूर्व विधायक बिप्लब मित्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
  • जावेद खान को प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • ममता कैबिनेट में पूर्व मंत्री रहीं चंद्रिमा भट्टाचार्य को राष्ट्रीय कार्य समिति का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
  • चंद्रिमा के बेटे और पूर्व पार्षद सौरव को बागी गुट की युवा इकाई (यूथ विंग) का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है।
  • एक अन्य पूर्व मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया है।

'हम व्यक्ति पूजा के खिलाफ'

विभिन्न इकाइयों के प्रमुखों के चयन के लिए रितब्रत कैंप दो दिन का पूर्ण सत्र आयोजित कर रहा है। शुक्रवार को रितब्रत ने अपनी कार्यप्रणाली साफ करते हुए कहा, "हमारे यहां सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। हम व्यक्ति विशेष की पूजा के सख्त खिलाफ हैं।" इसके अलावा, जानकारी के मुताबिक बागी गुट इसी सत्र के दौरान इस बात पर भी आखिरी फैसला लेगा कि वे 21 जुलाई को पड़ने वाला 'शहीद दिवस' मनाएंगे या नहीं।

कौन-कौन छोड़ चुका है ममता बनर्जी का साथ?

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी स्पष्ट रूप से दो धड़ों में बंट चुकी है और ममता बनर्जी के कई सबसे करीबी और दिग्गज नेता उनका साथ छोड़ चुके हैं। टीएमसी के टिकट पर जीते 80 में से लगभग 58-65 विधायकों ने बागी गुट का दामन थाम लिया है।

राज्यसभा से इस्तीफा देकर BJP में जाने वाले नेता

जून-जुलाई 2026 के घटनाक्रमों में टीएमसी के तीन प्रमुख राज्यसभा सांसदों ने उच्च सदन से इस्तीफा देकर कोलकाता में आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) ज्वाइन कर ली है।

सुष्मिता देव: पार्टी की तेजतर्रार नेता ने टीएमसी छोड़ दी है। उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी पर जमीनी स्तर तक व्यापक भ्रष्टाचार होने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

सुखेंदु शेखर रॉय: वरिष्ठ नेता ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि वामपंथियों के 34 साल और टीएमसी के 15 साल के शासन में बंगाल बर्बाद होकर रह गया है।

प्रकाश चिक बड़ाईक: इन्होंने भी राज्यसभा से इस्तीफा देकर सुखेंदु और सुष्मिता के साथ बीजेपी की सदस्यता ले ली है।

बागी गुट में शामिल होने वाले दिग्गज और विधायक

पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा अब पूरी तरह से बागी हो चुका है, जिसने ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने तक का ऐलान कर दिया है।

रितब्रत बनर्जी: इन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था, लेकिन अब यह 58 से ज्यादा बागी विधायकों के समर्थन के साथ बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बन गए हैं। बागी गुट ने अपनी 'नई टीएमसी' का इन्हें महासचिव भी घोषित किया है।

चंद्रिमा भट्टाचार्य: ममता बनर्जी की दशकों पुरानी वफादार और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने टीएमसी की प्रदेश अध्यक्ष सहित सभी पदों से 4 जुलाई 2026 को इस्तीफा दे दिया है। वे भी रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ नजर आ रही हैं और उन्होंने पार्टी में भरोसे के टूटने की बात कही है।

अरूप रॉय: पूर्व मंत्री, जिन्हें बागी नेताओं ने ममता बनर्जी की जगह अपने गुट का नया चेयरमैन घोषित किया है।

सायनी घोष: कभी ममता बनर्जी की सबसे वफादार और फायरब्रांड नेता मानी जाने वाली सायनी घोष ने भी बड़ा यू-टर्न लेते हुए बागी सांसदों और विधायकों के खेमे में अपनी जगह बना ली है।

फिरहाद हकीम: ममता के सबसे करीबियों में गिने जाने वाले फिरहाद हकीम ने भी कोलकाता नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है और वे भी अपनी निष्ठाएं बदल रहे हैं।

अन्य प्रमुख इस्तीफे

ज्योतिप्रिय मल्लिक: पूर्व मंत्री और ममता के एक और करीबी नेता ज्योतिप्रिय मल्लिक ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्हें इससे पहले ईडी ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से ही उनका राजनीतिक करियर ढलान पर था।

बागी गुट का दावा है कि असली टीएमसी वही हैं और वे पार्टी के नए नेतृत्व (अरूप रॉय और रितब्रत बनर्जी) की जानकारी चुनाव आयोग को सौंपने वाले हैं। विधानसभा के भीतर और बाहर बागियों के भारी समर्थन के चलते, टीएमसी संस्थापक ममता बनर्जी इस वक्त अपनी ही पार्टी में लगभग अकेली पड़ती दिखाई दे रही हैं।

Amit Kumar

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