ममता बनर्जी मेरी सबसे बड़ी दुश्मन, जब रेप पीड़िता की मां ने खाई कसम; कब तक नहीं करेंगी कंघी

Nisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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सियालदाह कोर्ट में पीड़िता के पैरेंट्स ने नया आवेदन दिया है। इसमें उन्होंने पूर्व विधायक निर्मल घोष, सोमनाथ दास और टीएमसी पदाधिकारी संजीव मुखोपाध्याय का नाम लिखा है। साथ ही मांग की है कि इन लोगों को गिरफ्तार किया जाए और पुलिस हिरासत में पूछताछ की जाए।

ममता बनर्जी मेरी सबसे बड़ी दुश्मन, जब रेप पीड़िता की मां ने खाई कसम; कब तक नहीं करेंगी कंघी

आरजी कर मेडिकल कॉलेज में दरिंदों की हवस का शिकार हुई छात्रा की मां रत्ना देबनाथ की कसम अभी अधूरी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कहा था कि वह बेटी को न्याय मिलने तक बालों में कंघी नहीं लगाएंगी। अब जब वह विधायक बन चुकी हैं, तो उन्होंने न्याय की जंग को और तेज कर दिया है। वह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानती हैं। फिलहाल, छात्रा के माता-पिता ने फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और तीन लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है।

गुरुवार को देबनाथ ने कहा, 'मैंने कल अपनी शपथ ली है। आज मुझे कुछ दस्तावेज जमा करने थे। मैं यहां वही करने आई हूं। सब कुछ ठीक है। ...मेरी बेटी इस जंग में हमेशा मेरे साथ ही है। मैं उसके बगैर कुछ नहीं कर सकती है। वह इस जंग में भी मेरे साथ है।' तृणमूल कांग्रेस पार्टी प्रमुख को लेकर उन्होंने कहा, 'मैं उनके बारे में कुछ नहीं कहूंगी। मुझे उनके बारे में कुछ नहीं कहना है। अगर वह चाहें, तो कोर्ट जा सकती हैं।'

खाई थी कसम

9 अप्रैल को देबनाथ ने कंघी नहीं करने की कसम खाई थी। उन्होंने कहा था, 'मेरी सबसे बड़ी दुश्मन ममता बनर्जी हैं क्योंकि वह स्वास्थ्य मंत्री हैं और मेरी बेटी स्वास्थ्य विभाग में काम करती थी। ममता बनर्जी ने मेरी बेटी को क्यों नहीं बचाया? मैंने कभी अपने बालों में कंघी नहीं की, मैं कसम खाती हूं कि जब तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिल जाता, मैं अपने बालों में कंघी नहीं करूंगी। मैं कल अपना नामांकन भरूंगी। लोग मेरा साथ दे रहे हैं और ममता बनर्जी को हारते हुए देखना चाहते हैं।'

लाठीचार्ज से सेल्फी तक का सफर

बुधवार को विधानसभा परिसर में पीटीआई-भाषा से बातचीत के दौरान देबनाथ ने कहा कि उनकी लड़ाई में एक अहम मोड़ तब आया जब वह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ हुई नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में शामिल होने मंगलवार को राज्य सचिवालय नबन्ना पहुंचीं। उन्होंने कहा, 'मुझे पिछले साल अगस्त का वह समय याद आ गया, जब मैंने पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान 'नबन्ना अभियान' में हिस्सा लेते हुए पुलिस लाठीचार्ज का सामना किया था। लेकिन इस बार नबान्ना के गेट पर तैनात कोलकाता पुलिस के कर्मी मेरे साथ सेल्फी लेना चाहते थे और वे मुझे अंदर तक लेकर गए।'

फिर पहुंचीं कोर्ट

सियालदाह कोर्ट में पीड़िता के पैरेंट्स ने नया आवेदन दिया है। इसमें उन्होंने पूर्व विधायक निर्मल घोष, सोमनाथ दास और टीएमसी पदाधिकारी संजीव मुखोपाध्याय का नाम लिखा है। साथ ही मांग की है कि इन लोगों को गिरफ्तार किया जाए और पुलिस हिरासत में पूछताछ की जाए। आरोप लगाए हैं कि इन लोगों ने पीड़िता के जल्दबाजी में दाह संस्कार कराने में अहम भूमिका निभाई है।

आरोप हैं कि तीनों ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से शव को निकाल लिया था और अंतिम क्रिया कर दी थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि दूसरी बार पोस्ट मॉर्टम को भी रोकने की कोशिश की गई थी और दाह संस्कार से पहले उन्हें दस्तावेज नहीं मिले थे।

बड़े अंतर से जीता चुनाव

4 मई को घोषित नतीजों में देबनाथ ने तृणमूल कांग्रेस को पनीहाटी सीट पर 28 हजार से ज्यादा मतों के बड़े अंतर से हराया था। उन्हें कुल 87 हजार 977 वोट मिले थे। जबकि, टीएमसी प्रत्याशी तीर्थांकर घोष को 59 हजार 141 वोट मिले। सीट पर तीसरे स्थान पर लेफ्ट के कलातन दासगुप्ता और चौथे स्थान पर सुभाष भट्टाचार्य थे।

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Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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