वकील बनीं ममता बनर्जी को SIR पर सुप्रीम कोर्ट से झटका, चीफ जस्टिस की हर राज्य को नसीहत
देश के कई राज्यों में चल रहे SIR के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में वकील बनकर पहुंचीं ममता बनर्जी को करारा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने साफ कर दिया है कि SIR की प्रक्रिया में किसी तरह की रोक लगाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसमें कोई बाधा भी पैदा करने की परमिशन अदालत नहीं देगी।

देश के कई राज्यों में चल रहे SIR के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में वकील बनकर पहुंचीं ममता बनर्जी को करारा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने साफ कर दिया है कि SIR की प्रक्रिया में किसी तरह की रोक लगाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। इसमें कोई बाधा भी पैदा करने की परमिशन अदालत नहीं देगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी राज्यों को इस बात को समझ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जो कुछ भी स्पष्टता चाहिए, वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जाएगी। आज की सुनवाई में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी भी वकील बनकर पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि ऐसा भी हुआ है कि अल्पसंख्यक बहुल विधानसभा क्षेत्रों में यदि 1000 वोटर थे तो उनमें से 950 को logical discrepancy सूची में डाल दिया गया है। इस दौरान वोटर लिस्ट में किसी नाम को जोड़ने पर आपत्ति जताने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म 7 पर भी बहस हुई। कल्याण बनर्जी ने कहा कि ऐसी बहुत सी आपत्तियां दायर हुई हैं, लेकिन यह तक नहीं पता कि इन्हें किन लोगों ने दायर किया है। सुनवाई के दौरान ऐसे लोगों को भी मौजूद रहना चाहिए, जिससे पता चले कि आखिर आपत्ति जताने वाले कौन हैं। एक व्यक्ति 1000 से ज्यादा आपत्तियां दायर कर दे रहा है। ऐसी सभी शिकायतें अज्ञात व्यक्ति के नाम से दायर होती हैं।
ममता के वकील बनने पर दायर अर्जी पर SC ने लगाई लताड़
बता दें कि इस मामले में एक और अर्जी भी दाखिल हुई थी, जिसमें ममता बनर्जी के अदालत में वकील के तौर पर पेश होने पर आपत्ति जताई गई थी। इस पर बेंच ने कहा कि इसमें ऐसा क्या है, जिसकी सुनवाई की जानी चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि कोई सीएम वकील के तौर पर पेश होता है तो यह हमारे संविधान की ताकत को दिखाता है। इसमें आपत्ति जैसी कोई बात नहीं है। इस मसले पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
असम का हवाला देकर ममता ने जताई थी क्या आपत्ति
बता दें कि SIR को लेकर ममता बनर्जी ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि असम में यह नहीं हो रहा है, जहां भाजपा की सरकार है। लेकिन विपक्षी दलों की सत्ता वाले राज्यों में ही भाजपा इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। इस केस में ममता बनर्जी वकील के रूप में पहुंची थीं। यह भारत की अदालतों के इतिहास में पहला मौका था, जब कोई मौजूदा मुख्यमंत्री वकील के तौर पर कोर्ट में दलीलें देने के लिए पहुंचा।
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