सड़क पर उतरें या सिंबल बचाएं, ममता के सामने TMC को बचाने की चुनौती; कांग्रेस के आगे करना होगा सरेंडर?

लाइव हिन्दुस्तान, ● पंकज कुमार पांडेय, नई दिल्ली।
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राष्ट्रीय राजनीति में भी ममता बनर्जी की भूमिका पहले की तुलना में कमजोर हुई है। इंडिया गठबंधन में प्रभाव बनाए रखना और राष्ट्रीय विपक्ष की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता साबित करना उनके लिए एक नई चुनौती बन गई है।

Mamata Banerjee Faces Dual Challenge Will TMC Surrender before Congress

ममता बनर्जी इस समय अपनी राजनीतिक पारी की सबसे मुश्किल चुनौती से जूझ रही हैं। संघर्ष से अपनी पहचान बनाने वाली 71 वर्षीय ममता क्या अब दोबारा उस भूमिका में आ सकती हैं? पार्टी के अंदर विद्रोह ने इस सवाल को काफी पेचीदा बना दिया है। ममता सड़क पर संघर्ष करें या पहले पार्टी का अस्तित्व और सिंबल बचाएं, यह बड़ी चुनौती उनके सामने है।

विधानसभा में टीएमसी की कमजोर स्थिति से यह आशंका प्रबल हो गई है कि ममता फिलहाल केंद्रीय राजनीति में भी पहले जैसी मजबूत भूमिका में नहीं रहेंगी। विपक्ष में प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए उन्हें उसी कांग्रेस के सामने झुकना होगा, जिनके ऊपर टीएमसी अपनी शर्तें मजबूती से थोपती थी। फिलहाल लोकसभा और राज्यसभा में पार्टी के कई सांसद असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। अगर वे अलग हुए तो ममता को महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी की तरह चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद से ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को बचाने की है। तृणमूल कांग्रेस के दर्जनों विधायक बागी रुख अपना चुके हैं और पार्टी के भीतर समानांतर शक्ति केंद्र उभरने लगे हैं। हाल के कार्यक्रमों और बैठकों में सांसदों, विधायकों की कम उपस्थिति ने ममता के सामने चुनौती स्पष्ट कर दी है। संगठन को बचाने के लिए पार्टी ने अपने कई मोर्चों में बड़े बदलाव किए हैं, लेकिन असंतोष खत्म होता नहीं दिख रहा।

राष्ट्रीय राजनीति में भी ममता बनर्जी की भूमिका पहले की तुलना में कमजोर हुई है। इंडिया गठबंधन में प्रभाव बनाए रखना और राष्ट्रीय विपक्ष की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता साबित करना उनके लिए एक नई चुनौती बन गई है।

कानूनी चुनौतियां भी ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले, संदेशखाली विवाद और अन्य मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सबकी नजर है। भाजपा के केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर मजबूत होने के बाद इन मामलों में दबाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। सीआईडी के बाद ईडी की दस्तक से ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी मुश्किल में घिरते दिख रहे हैं और ममता द्वारा बनाया गया वर्षों पुराना कैडर जमीन पर बिखरता दिख रहा है।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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