ममता बनर्जी की हार और TMC की टूट से कांग्रेस की होगी चांदी? ऐक्शन मोड में राहुल गांधी

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। इसी बीच कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और राहुल गांधी की मुलाकात ने तृणमूल कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। राहुल से मुलाकात के बाद चौधरी ने कहा कि बंगाल में कांग्रेस को फिर से बढ़ाने के लिए यह सही समय है।

ममता बनर्जी की हार और TMC की टूट से कांग्रेस की होगी चांदी? ऐक्शन मोड में राहुल गांधी

Mamata Banerjee Rahul Gandhi: पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पार्टी के दर्जनों विधायक और कई सांसद बागी हो चुके हैं। राज्यसभा से तीन सांसदों का इस्तीफा हो चुका है। सयोनी घोष, शताब्दी रॉय, काकोली दास्तीदार जैसे भरोसेमंद सहयोगी खुलकर ममता के विरोध में आ चुके हैं। दावा है कि यह सांसद और विधायक मिलकर टीएमसी पर दावा करके ममता बनर्जी को हाशिए पर धकेल सकते हैं। इसके साथ ही यह लोकसभा में एनडीए सरकार को भी समर्थन देंगे। इन सबसे केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी को फायदा होना तय है। लेकिन अब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी ममता बनर्जी की हार और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की टूट का फायदा उठाने की तैयारी में है।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ममता बनर्जी की हार के बाद बंगाल में कांग्रेस पार्टी एक बार फिर से अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। 1977 के बाद से लगातार बंगाल की सत्ता से बाहर रहने वाली कांग्रेस पार्टी एक बार फिर से राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की तरफ देख रही है। इसके लिए सबसे ज्यादा मेहनत पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी कर रहे हैं। ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के बड़े आलोचक चौधरी ने शनिवार को राहुल गांधी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का यह 'स्वर्णिम अवसर' है।

मुस्लिम वोट को अपने खेमे करने की कोशिश में कांग्रेस

बता दें, पहले वामपंथी पार्टियों और फिर तृणमूल कांग्रेस के सामने कांग्रेस लगातार पश्चिम बंगाल में हाशिए पर रही है। इस विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सत्ता हासिल की, तो वहीं कांग्रेस पार्टी केवल दो सीटों पर सिमट कर रह गई। अब जबकि तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से बिखर चुकी है और बागी नेताओं में कोई बड़ा चेहरा नहीं है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस पार्टी 27 फीसदी मुस्लिम वोट और टीएमसी के वोट को अपने खेमे में करने की कोशिश में हैं।

इतना ही नहीं विधानसभा चुनाव की हार के बाद टीएमसी के कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। भाजपा की तरफ से कहा जा चुका है कि वह टीएमसी कैडर को पार्टी में शामिल नहीं करेंगे। ऐसे में अधीर रंजन चौधरी का दावा है कि कई टीएमसी के नेता कांग्रेस में शामिल होने के इच्छुक हैं। बता दें, चौधरी शुरुआत से ही ममता बनर्जी के विरोधी रहे हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी ने उनकी सीट से यूसुफ पठान को टिकट दे दिया था। इसके बाद मुस्लिम वोट की वजह से अधीर रंजन चौधरी को हार का सामना करना पड़ा था। चौधरी, बंगाल में वामपंथियों के साथ गठबंधन के प्रबल समर्थक रहे हैं। हालांकि, राज्य स्तर पर कांग्रेस के कई नेता इसका विरोध करते हैं।

ममता के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें

पार्टी की टूट से परेशान ममता बनर्जी को लेकर एक दावा यह भी सामने आया था कि वह अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर सकती हैं। एक समय पर कांग्रेस से ही निकलीं ममता के लिए यह भी एक खुला विकल्प है। हालांकि, टीएमसी और कांग्रेस की तरफ से बाद में इन दावों को केवल अफवाह करार दिया गया। टीएमसी की तरफ से कहा गया कि कांग्रेस के साथ वह गठबंधन के लिए तैयार हैं, विलय का सवाल पैदा नहीं होता है। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे के टीएमसी के ऊपर डालते हुए कहा कि अगर विलय करना है तो इसके लिए टीएमसी की तरफ से ऑफर आना चाहिए।

ममता बनर्जी दे चुकी हैं कांग्रेस को जख्म

कभी कांग्रेस की युवा नेता रहीं ममता बनर्जी ने पार्टी को तोड़कर बंगाल में अपनी नई जमीन तैयार की थी। ममता के जाने के बाद से ही बंगाल में कांग्रेस पार्टी पहले से सिकुड़ती जमीन और भी ज्यादा खतरे में आ गई। हालांकि बाद में यूपीए के समय में दोनों दल फिर से साथ आ गए। लेकिन मोदी सरकार के सामने ममता बनर्जी ने कांग्रेस के नए नवेले गठबंधन 'INDIA' को कभी भाव नहीं दिया। राष्ट्रीय स्तर पर भले ही ममता बनर्जी खुद को इस गठबंधन का हिस्सा बताती रहीं, लेकिन बंगाल में उन्होंने कांग्रेस को परेशान करके रखा 2024 लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी और कांग्रेस बंगाल में अकेले-अकेले चुनाव लड़ीं। इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी अपनी सीट हार गए।

विधानसभा चुनाव के पहले भी कांग्रेस पार्टी ने गठबंधन की तरफ देखा लेकिन ममता ने एक बार फिर से इनकार कर दिया। लोकसभा चुनाव में तो ममता का प्रदर्शन सही रहा लेकिन विधानसभा चुनाव में स्थिति पूरी तरह से पलट गई। ममता बनर्जी का 15 साल पुराना किला ध्वस्त हो गया। सत्ता में रहकर कांग्रेस को सुनाने वाली ममता 4 मई के बाद से विपक्षी एकता की बात करने लगीं। हालांकि, राजनीति में ऐसी बातें चलती रहती हैं। तमाम उठा पटक के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने ममता का INDIA गठबंधन में स्वागत किया और दिल्ली की बैठक में सोनिया गांधी के साथ बैठाया।

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Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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