वॉट्सऐप पर चल रहा चुनाव आयोग, हटा दिए शादीशुदा महिलाओं के नाम; ममता बनर्जी का दावा

Jan 13, 2026 05:26 pm ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर हमला करते हुए कहा कि यह केवल  वॉट्सऐप पर चल रहा है और दिन में कई बार एसआईआर के नियम बदल दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर में उपनाम बदलने वाली महिलाओं के नाम ही काट दिए गए।

वॉट्सऐप पर चल रहा चुनाव आयोग, हटा दिए शादीशुदा महिलाओं के नाम; ममता बनर्जी का दावा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को लेकर बड़ा दावा किया है। कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बनर्जी ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में उन महिलाओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए जिन्होंने अपने उपनाम बदले थे। उन्होंने कहा कि शादी के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं को वोट डालने का अधिकार ही नहीं दिया जा रहा है। चुनाव आयोग पर बरसते हुए सीएम बनर्जी ने कहा कि आयोग वॉट्सऐप पर ही चल रहा है। एसआईआर को लेकर जब देखो तब नियम ही बदल दिए जाते हैं।

बीजेपी का AI इस्तेमाल कर रहा चुनाव आयोग

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने भाजपा के एआई उपकरण का इस्तेमाल किया, जिससे एसआईआर डेटा में नामों के मेल न खाने की समस्या सामने आई। एसआईआर के दौरान, निर्वाचन आयोग ने उन विवाहित महिलाओं के नाम हटा दिए, जिन्होंने उपनाम बदल लिए थे। बनर्जी ने कहा कि आखिर मुख्य निर्वाचन आयुक्त यह कैसे तय कर सकते हैं कि मतदाता सूची का आधा हिस्सा हटाया जाए और किसकी सरकार बननी चाहिए।

निर्वाचन आयोग बीजेपी की कठपुतली- ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने कहा, निर्वाचन आयोग भाजपा के कठपुतली की तरह काम कर रहा है, बिना कारण बताए मनमाने ढंग से नामों को हटा रहा है। एसआईआर नियमों के अनुसार सूक्ष्म पर्यवेक्षकों का इस्तेमाल प्रतिबंधित है, इन्हें केवल बंगाल में तैनात किया गया है। इसके अलावा अगर बिहार में अधिवास प्रमाण पत्र को अनुमति दी गई, तो बंगाल में क्यों नहीं दी गई?

एक दिन पहले ही ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपना पांचवां पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण "नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है, पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं और इसके परिणामस्वरूप उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।" ममता बनर्जी ने एसआईआर सुनवाई के दौरान मतदाताओं द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की रसीद या पावती जारी न किए जाने को सबसे गंभीर खामियों में से एक बताया।

उन्होंने लिखा, "यह देखा गया है कि SIR के तहत होने वाली सुनवाइयों के दौरान मतदाता अपनी पात्रता के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज जमा कर रहे हैं। हालांकि, कई मामलों में इन दस्तावेजों की कोई उचित पावती या रसीद जारी नहीं की जा रही है।' मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यापन के चरण में इन दस्तावेजों को अक्सर "नहीं मिले" या "रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं" बताया जाता है, जिसके आधार पर मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाते हैं।

Ankit Ojha

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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