कांग्रेस ने मदद नहीं ममता बनर्जी को ताने दिए, भाजपा का नाम लेकर खूब सुनाया
mamata banerjee: ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट पर संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया है। बीते दो विधानसभा चुनावों के नतीजों को देखते हुए यह सीट तृणमूल कांग्रेस के लिए बेहद मुश्किल साबित हो सकती है। 6 अक्टूबर को वोटिंग होना है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। कभी मजबूत रही तृणमूल कांग्रेस को लेकर दावा किया जा रहा है कि उसने भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए कांग्रेस से मदद मांगी है। हालांकि, टीएमसी इस दावे को गलत बता रही है। जबकि, कांग्रेस इस मामले में टीएमसी पर तंज कसती नजर आ रही है। दरअसल, यह पूरी बात नंदीग्राम में होने वाले उपचुनाव को लेकर है, जिससे भाजपा और टीएमसी दोनों की ही साख जुड़ी हुई है। सीट पर वोटिंग 6 अक्टूबर को है और नतीजे 9 अक्टूबर को आएंगे।
2007 में चर्चा में आया नंदीग्राम साल 2011 में टीएमसी के शासन में आने से लेकर 2021 तक पार्टी का गढ़ रहा। इसमें सेंध तब लगी, जब शुभेंदु अधिकारी ने तब मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी को हरा दिया था। दूसरा झटका तृणमूल को अगले ही चुनाव यानी 2026 में लगा, जब यहां से पार्टी के नेता पवित्र कर भी हार गए और विजेता दूसरी बार भी शुभेंदु रहे।
क्या बोली कांग्रेस
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने दावा किया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे ने करीब 15 दिन पहले नई दिल्ली में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से संपर्क किया था। उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि नंदीग्राम उपचुनाव कांग्रेस लड़े, जबकि रेजीनगर सीट पर तृणमूल चुनाव लड़े। भट्टाचार्य ने पीटीआई-भाषा से कहा, 'प्रस्ताव यह था कि तृणमूल कांग्रेस रेजीनगर से चुनाव लड़ेगी और नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ देगी। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस पर समय मांगा और बाद में प्रदेश के नेताओं से इस प्रस्ताव पर चर्चा की।'
उन्होंने कहा, 'प्रदेश नेतृत्व का मानना था कि गठबंधन के लिए यह सही समय नहीं है। उचित समय आने पर इस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन अभी नहीं। यह सही फैसला है।'
कांग्रेस ने TMC पर कसा तंज
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुमन रॉय चौधरी ने भी कहा कि यह प्रस्ताव तृणमूल कांग्रेस की ओर से आया था। उन्होंने कहा, ''जब तृणमूल सत्ता में थी, तब उसने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया था, जब भाजपा के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना थी। अब जब वह अकेली और पराजित है, तो ऐसा लगता है कि उसे कांग्रेस के महत्व का एहसास हुआ है।'
कांग्रेस के एक अन्य नेता ने दावा किया कि नंदीग्राम अब भी तृणमूल के लिए कड़े मुकाबले वाली सीट है और उन्होंने सुझाव दिया कि सीट छोड़ने का प्रस्ताव देना खुद इस बात को दर्शाता है कि पार्टी इस चुनावी चुनौती को किस तरह देख रही है। कांग्रेस नेता ने कहा, 'नंदीग्राम एक कठिन सीट है और तृणमूल को पूरा भरोसा है कि वह यहां हार जाएगी। इसी वजह से वह यह सीट कांग्रेस को देने की पेशकश कर रही है।''
TMC ने मना कर दिया
हालांकि, तृणमूल ने इस दावे को खारिज कर दिया। कथित प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने इस दावे को नकार दिया। तृणमूल के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने इस दावे पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा कोई कदम राज्य में केवल भाजपा के लिए फायदेमंद होगा।
पश्चिम बंगाल में बदले समीकरण
कांग्रेस और तृणमूल के अलग-अलग दावों ने पश्चिम बंगाल में पहले से बिखरे विपक्षी समीकरणों को और उलझा दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल, कांग्रेस और वाम दल विपक्षी गठबंधन INDIA के घटक हैं, लेकिन राज्य के चुनावों में वे एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं।
कांग्रेस ने पूछा- अब क्यों जरूरत पड़ रही है
भट्टाचार्य ने कहा, 'तृणमूल कहा करती थी कि वह अकेले भाजपा से मुकाबला कर सकती है। अब उसे कांग्रेस की जरूरत क्यों पड़ रही है?' उन्होंने कहा कि तृणमूल के संगठनात्मक संकट और विधानसभा चुनाव में मिली हार ने राजनीतिक समीकरण बदल दिया है। उन्होंने कहा, 'भाजपा के हाथों विधानसभा चुनाव में हार और अब तृणमूल के तीन हिस्सों में बंट जाने के बाद ऐसा लगता है कि उसे पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के महत्व का एहसास हुआ है।'
कौन किस सीट से लड़ रहा है चुनाव
प्रमुख विपक्षी दलों में कांग्रेस सबसे पहले उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। उसने 11 सितंबर को नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी को उम्मीदवार बनाया।
इसके बाद वाम दलों ने अपने उम्मीदवार घोषित किए, जबकि बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल ने बाद में नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल धड़े ने भी चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा की है। इसके बाद भाजपा ने हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया।
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीट से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत हासिल की। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया, जिससे वहां उपचुनाव कराना पड़ रहा है।


