
SIR के विरोध में आज SC पहुंचेंगी ममता बनर्जी, वकील बन चुनाव आयोग के खिलाफ खुद करेंगी बहस
ममता बनर्जी के पास कानून की डिग्री है। उन्होंने कलकत्ता के जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज ऑफ लॉ से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। हालांकि, उनके वकील के तौर पर अभ्यास करने की आखिरी रिपोर्ट साल 2003 की है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को देश की सर्वोच्च अदालत में एक नई भूमिका में नजर आएंगी। चुनाव आयोग द्वारा राज्य में चलाए जा रहे 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली अपनी याचिका पर ममता बनर्जी ने खुद बहस करने की अनुमति मांगी है। यह मामला न केवल कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भी अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक अंतरिम आवेदन दायर कर अदालत से व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपनी बात रखने की इजाजत मांगी है। उनके नाम से जारी 'गेट पास' इस बात की पुष्टि करता है कि वे कल अपने वकीलों की टीम के साथ मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पांचोली की पीठ के समक्ष उपस्थित रहेंगी।
ममता बनर्जी ने अपने आवेदन में तर्क दिया है कि चूंकि वह इस याचिका की मुख्य याचिकाकर्ता हैं और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष भी हैं, इसलिए वह इस मामले के तथ्यों और जमीनी वास्तविकताओं से गहराई से परिचित हैं।
ममता बनर्जी के पास कानून की डिग्री है। उन्होंने कलकत्ता के जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज ऑफ लॉ से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। हालांकि, उनके वकील के तौर पर अभ्यास करने की आखिरी रिपोर्ट साल 2003 की है। अपने आवेदन में उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा और प्रक्रिया से पूरी तरह अवगत हैं और स्थापित नियमों के अनुसार ही आचरण करेंगी। उनका मानना है कि व्यक्तिगत उपस्थिति से अदालत को मामले के प्रभावी निपटारे में मदद मिलेगी।
क्या हैं ममता बनर्जी की मुख्य मांगें?
मुख्यमंत्री ने अपनी रिट याचिका में चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी किए गए कई निर्देशों को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव वर्तमान मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं, न कि उस संशोधित सूची पर जो एसआईआर के बाद तैयार होगी। याचिका में कहा गया है कि नामों की स्पेलिंग में अंतर या छोटी-मोटी 'लॉजिकल विसंगतियों' के लिए मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए न बुलाया जाए। इसके बजाय, उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर अधिकारी खुद इनमें सुधार करें। उन्होंने मांग की है कि सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी किए गए सभी पहचान पत्रों को वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
ममता बनर्जी का आरोप है कि चुनाव आयोग की इस विशेष संशोधन प्रक्रिया से पश्चिम बंगाल के नागरिकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष इसे चुनाव से पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया बता रहा है, जबकि सत्ताधारी दल इसे मतदाताओं को परेशान करने के प्रयास के रूप में देख रहा है। अब सबकी निगाहें आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।





