भारत से बैर रखने वाले मालदीव के मुइज्जू के मन में क्या चल रहा है! PM मोदी को थैंक्यू बोल चीन को दे दिया बड़ा प्रोजेक्ट
चीन की कंपनी को थिलाफुशी में पोर्ट का ठेका मिलना अहम है। यह इलाका भारत के ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का भी अहम हिस्सा है। हाल ही में राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत की मदद से बन रहे थिलामाले ब्रिज की तारीफ की थी।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने हाल ही में भारत का शुक्रिया अदा किया था। मुइज्जू ने भारत के सहयोग से बन रही थिलामाले ब्रिज को भारत-मालदीव के मजबूत संबंधों का प्रतीक भी बताया था। अब इसके कुछ ही दिनों बाद मालदीव चीन से याराना निभाते नजर आया है। मालदीव ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम एक प्रोजेक्ट का ठेका चीन की सरकारी कंपनी को दे दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक थिलाफुशी पोर्ट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के पहले चरण का काम चीन की सरकारी कंपनी 'चीन हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी' (CHEC) को सौंप दिया गया है। अब यह माना जा रहा है कि ‘इंडिया आउट कैंपेन’ चलाकर सत्ता में आए मुइज्जू भले ही अब भारत के प्रति अपना रुख नरम करने के संकेत दे रहे हों, लेकिन वे भारत और चीन दोनों देशों को साधने की कूटनीतिक चाल चल रहे हैं।
चीन को क्या मिला?
मालदीव की सरकारी पोर्ट ऑपरेटर 'मालदीव पोर्ट्स लिमिटेड' (MPL) ने इस साल की शुरुआत में ही चीन की CHEC कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। प्रोजेक्ट के तहत मौजूदा 5 हेक्टेयर के पोर्ट का विस्तार करके उसे 20 हेक्टेयर का बनाया जाएगा। इसमें कई आधुनिक सुविधाएं होंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य मालदीव के मौजूदा बंदरगाहों पर भीड़भाड़ को कम करना और माल की सप्लाई के समय को घटाना है। दरअसल नवंबर 2027 तक माले के मुख्य बंदरगाह को थिलाफुशी में ट्रांसफर करने की योजना है। यह पोर्ट प्रोजेक्ट पिछले 40 सालों से मालदीव का सपना रहा है।
एक ही द्वीप पर भारत और चीन!
गौरतलब है कि थिलाफुशी माले में स्थित एक कृत्रिम द्वीप है। यह इलाका भारत के प्रमुख प्रोजेक्ट 'ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट' का भी हिस्सा है। भारत इस परियोजना के तहत 6.7 किमी लंबा नेटवर्क बना रहा है, जो माले, विलिमाले, गुलहिफालहू और थिलाफुशी को आपस में जोड़ेगा। इसे भारत के एग्जिम बैंक से 400 मिलियन डॉलर क्रेडिट लाइन और 100 मिलियन डॉलर की सीधी मदद से बनाया जा रहा है।
अब स्थिति यह बन गई है कि भारत जिस थिलाफुशी द्वीप तक पहुंच के लिए पुल और सड़कें बना रहा है, उसी द्वीप पर मुख्य कमर्शियल पोर्ट बनाने का ठेका चीन की कंपनी को मिल गया है। अब हिंद महासागर में मालदीव की रणनीतिक स्थिति और व्यस्त समुद्री मार्गों के पास होने के कारण इस द्वीप पर भारत और चीन दोनों की मौजूदगी को करीब से देखा जा रहा है।
मजबूरी में मुइज्जू ने लिया था यू-टर्न
मोहम्मद मुइज्जू इंडिया आउट के नारे के साथ राष्ट्रपति बने थे और वे पहले विदेशी दौरे पर भी चीन गए थे। हालांकि बाद में मालदीव पर जब संकट आया, तब उन्हें भारत की याद आई। भारत ने मालदीव को 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप व्यवस्था और आरबीआई के जरिए 3,000 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी, जिससे मालदीव डिफॉल्ट होने से बच सका। आर्थिक मदद के बाद मुइज्जू ने भारत से अपने रिश्ते सुधारे और अब वे पीएम मोदी और भारत सरकार की सार्वजनिक रूप से तारीफ कर रहे हैं। हालांकि अब एक बार फिर चीन के साथ उनका बैलेंसिंग एक्ट चर्चा में है।


