किरायेदार हटाने से पहले मालिक को साबित करनी होगी वजह; बेदखली पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Apr 09, 2026 08:29 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कहा है कि दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत बेदखली की मांग करने वाले मकान मालिक को उन अन्य संपत्तियों पर कब्जा न करने का संतोषजनक स्पष्टीकरण देना कानूनी रूप से अनिवार्य है…

किरायेदार हटाने से पहले मालिक को साबित करनी होगी वजह; बेदखली पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कहा है कि दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम ( DRC) के तहत बेदखली की मांग करने वाले मकान मालिक को उन अन्य संपत्तियों पर कब्जा न करने का संतोषजनक स्पष्टीकरण देना कानूनी रूप से अनिवार्य है, जो बेदखली की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले या उसके दौरान खाली हुई हों। न्यायमूर्ति अमित शर्मा ने इस मामले में दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिका दायर करने से पहले वैकल्पिक व्यावसायिक स्थानों को फिर से किराये पर देना या बेचना मकान मालिक की वास्तविक जरूरत पर गंभीर संदेह पैदा करता है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, याचिकाकर्ता वेद प्रकाश ने मस्जिद मोठ स्थित लीला राम मार्केट में भूतल पर स्थित दुकान संख्या 438 के किरायेदार मेसर्स गे ड्राई क्लीनर्स के खिलाफ डीआरसी की धारा 14(1)(ई) के तहत बेदखली की याचिका दायर की थी। मकान मालिक का दावा था कि उनके बेटे जतिंदर अत्री को इस दुकान की वास्तविक जरूरत है, क्योंकि पहली मंजिल पर स्थित उनकी संपत्ति संख्या 439 में चल रहा अचल संपत्ति का व्यवसाय व्यावसायिक रूप से लाभदायक नहीं है।

वहीं, किरायेदारों ने याचिका का पुरजोर विरोध किया और खुलासा किया कि मकान मालिक के पास उसी बाजार में कई अन्य दुकानें (संख्या 435, 436, 437, 439 और 440) हैं, जिन्हें मुकदमेबाजी शुरू होने से ठीक पहले बेच दिया गया था या नए किरायेदारों को फिर से किराए पर दे दिया गया था।

कोर्ट में क्या दिया गया तर्क?

मकान मालिक की ओर से वकील ने तर्क दिया कि मकान मालिक अपनी जरूरतों का सर्वोत्तम निर्णयकर्ता होता है और अदालत को यह नहीं बताना चाहिए कि वह अपनी कई संपत्तियों में से किसका चुनाव करे। उन्होंने कहा कि बेदखली याचिका तत्काल दायर की जाती है, इसलिए मकान मालिक को यह बताने की जरूरत नहीं है कि जरूरत कब उत्पन्न हुई।

दूसरी ओर, किरायेदारों के वकील ने आरोप लगाया कि मकान मालिक ने उपलब्ध वैकल्पिक संपत्तियों के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए हैं। उन्होंने बताया कि याचिका दायर करने से मात्र चार महीने पहले दुकान संख्या 435 खाली हुई थी, लेकिन उसे तुरंत दूसरे किरायेदार को दे दिया गया। इसके अलावा, मकान मालिक के बेटे ने अन्य भूतल की दुकानों को उप-किराए पर भी दे दिया था, जो जरूरत के दावे को कमजोर करता है।

कोर्ट ने क्या कहा?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति अमित शर्मा ने साफ कहा कि दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत बेदखली के लिए मकान मालिक को वास्तविक (Bona Fide) आवश्यकता साबित करने का बोझ उठाना पड़ता है। मात्र अपनी इच्छा या मनमानी बताना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने मकान मालिक की जिरह पर भी गंभीर टिप्पणी की। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि जिरह के दौरान मकान मालिक ने अपने बेटे की आय के बारे में अनभिज्ञता जताई, जिससे उनका दावा काफी कमजोर पड़ गया।

कोर्ट ने आगे कहा कि अतिरिक्त किराया नियंत्रक (ARC) द्वारा की गई यह टिप्पणी कि याचिकाकर्ता ने अपनी जिरह में बेटे की आय के बारे में अनभिज्ञता का नाटक किया, जो स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बेदखली याचिका में उठाया गया आधार वास्तविक नहीं था। इस दौरान कोर्ट ने जोर देकर कहा कि मकान मालिक को अपनी अन्य संपत्तियों पर कब्जा न करने का संतोषजनक स्पष्टीकरण देना जरूरी है, खासकर यदि वे संपत्तियां याचिका दायर करने से कुछ समय पहले खाली हुई हों।

इस दौरान अदालत ने पाया कि...

ःसंपत्ति संख्या 435 को याचिका दायर करने से मात्र चार महीने पहले फिर से किराए पर दे दिया गया था

ःसंपत्ति संख्या 436 को मुकदमे की सुनवाई के दौरान भी लगातार नए किरायेदारों को दिया जा रहा था

ः2014 में संपत्ति संख्या 440 को बेचने के पीछे 'निर्माण कार्य' का जो दावा किया गया, उसका कोई दस्तावेजी सबूत नहीं पेश किया गया

और अंत न्यायमूर्ति अमित शर्मा ने कहा कि अतिरिक्त किराया नियंत्रक का फैसला न तो मनमाना था और न ही अनुचित। मकान मालिक द्वारा कई दुकानों को किराए पर देने और बेचने के आचरण ने ‘वास्तविक आवश्यकता’ के दावे को पूरी तरह कमजोर कर दिया। अदालत ने मकान मालिक की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए अतिरिक्त किराया नियंत्रक द्वारा बेदखली याचिका खारिज करने वाले आदेश को बरकरार रखा।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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