ओडिशा में बड़ा उलटफेर, विपक्ष के हाथ से सीट निकाल ले गई भाजपा; पुराने साथी ने BJD को दिया झटका
ओडिशा विधानसभा में उलटफेर करते हुए भाजपा ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। राज्य में 12 साल में पहली बार राज्यसभा के लिए वोटिंग हुई है, क्योंकि चार सीटों के लिए 5 उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा ने दो सीटों के साथ-साथ एक फंसी हुई सीट भी निकाल ली है।

ओडिशा में सत्ता धारी भारतीय जनता पार्टी ने तीन राज्यसभा सीटों पर जीत दर्ज की है। विधायकों की संख्या के हिसाब से भाजपा की दो सीटें पक्की थी, जबकि विपक्षी बीजेडी की एक सीट पक्की थी। भाजपा ने तीसरी सीट के लिए निर्दलयी उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेडी के पूर्व नेता दिलीप रे को अपना समर्थन दिया था। कांग्रेस और बीजेडी के विधायकों की क्रॉस वोटिंग की वजह से भाजपा ने विपक्ष के मुंह से यह सीट भी छीन ली है।
तीन राज्यसभा सीटों पर जीत दर्ज करने की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने मीडिया के सामने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, "यह ओडिशा राज्य के लिए एक यादगार दिन है। हमारे द्वारा उतारे गए तीन उम्मीदवार आज राज्य सभा चुनाव जीत गए हैं। भाजपा के उम्मीदवार मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और भाजपा समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की है।"
मुख्यमंत्री मांझी ने क्रॉस वोटिंग के लिए भी विपक्षी विधायकों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, "सभी विधायकों ने, चाहें वे कांग्रेस के हों या बीजेडी के... उन्होंने ओडिशा को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए इन तीन उम्मीदवारों के पक्ष में भारी मतदान किया है। निश्चित रूपसे सभी ओडिशा को एक समृद्ध राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।"
गौरतलब है कि चार विधानसभा सीटों के लिए भाजपा की तरफ से दो उम्मीदवार उतारे गए थे, जबकि एक सीट के लिए निर्दलीय उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे भी मैदान में थे। भाजपा ने इनको समर्थन दिया हुआ था। विधायकों की संख्या के हिसाब से भाजपा की दो सीटें पक्की थीं, जबकि बीजेडी की एक सीट पर जीत तय थी। मामला चौथी सीट को लेकर फंसा हुआ था। इसके लिए बीजेडी को कांग्रेस और लेफ्ट पार्टी का समर्थन प्राप्त था। लेकिन भाजपा ने तीन कांग्रेस और दो बीजेडी विधायकों को अपनी तरफ कर मामला पलट दिया।
इससे पहले, वोटिंग के दौरान कांग्रेस की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष भक्ता चरण दास ने क्रॉस वोटिंग की पुष्टि करते हुए कहा कि कांग्रेस के तीन विधायकों रमेश जेना, दशरथी गोमांगो और सोफिया फिरदौस ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में वोट दिया है। वहीं, बीजेडी विधायक देवी रंजन त्रिपाठी ने खुले तौर पर बगावत को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने रे को वोट दिया है। इसके अलावा एक और विधायक सौविक बिस्वाल की पत्नी ने भी दावा किया था कि उनके पति ने पार्टी लाइन से अलग जाकर वोट किया है।


