लोहागढ़ किले पर कांड करने वाली सिया गोयल के परिवार को बड़ा झटका, दुकान बंद
पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या में मुख्य आरोपी सिया गोयल के परिवार को बड़ा झटका लगा है। उनकी पुणे स्थित दुकान पर कार्रवाई की गई है और प्रशासन ने अगले आदेश तक इसे बंद करने के आदेश दे दिए हैं।

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की आरोपी सिया गोयल के परिवार की मसाला और सूखे मेवों की दुकान को कथित नियमों के उल्लंघन के मामले में नोटिस जारी किया है। नियामक ने दुकान का कामकाज तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि यह दुकान 'मेसर्स बीजी गोयल एंड कंपनी' द्वारा संचालित की जाती है, जो वर्तमान में जेल में बंद सिया गोयल के परिवार की है। यह दुकान पुणे शहर के मध्य में स्थित 'मार्केट यार्ड' इलाके में है। अधिकारियों ने बताया कि एफडीए की टीम द्वारा दुकान परिसर का निरीक्षण करने के बाद उसे अगले आदेश तक व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह बंद करने को कहा गया है।
क्या थी वजह
एफडीए के अनुसार, उसके अधिकारियों ने इस प्रतिष्ठान की जांच की और खाद्य उत्पादों के चार नमूने एकत्र किए, जिनमें 'संत' और 'साधु' ब्रांड की हल्दी का पाउडर, तिल और सोयाबीन वडियां शामिल हैं।
नियामक ने बताया कि इन उत्पादों पर गलत या अधूरी जानकारी लिखे होने (लेबल संबंधी नियमों के उल्लंघन) और संभावित मिलावट के संदेह में जांच के दौरान 8.14 लाख रुपये मूल्य का कुल 4,172 किलोग्राम माल जब्त किया गया है।
खाद्य सुरक्षा नियामक प्राधिकरण ने कहा कि यह कार्रवाई तब की गई जब कंपनी को खाद्य सुरक्षा और मानक (एफएसएस) अधिनियम के तहत कुछ अनिवार्य नियमों का पालन न करते हुए पाया गया। एफडीए ने यह भी कहा कि प्रतिष्ठान अपने लाइसेंस विवरण में जरूरी सुधार करने में भी विफल रहा था।
एक अधिकारी ने कहा, 'इन उल्लंघनों को ध्यान में रखते हुए, प्रतिष्ठान को अगले आदेश तक अपनी व्यावसायिक गतिविधियां रोकने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया गया है।' सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले की पहाड़ी चढ़ाई के दौरान सिया के मंगेतर केतन अग्रवाल को खाई में धक्का दे दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
खत्म हो रही है हिरासत
3 जुलाई को पुणे की एक अदालत ने सिया और चेतन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। तब अभियोजन पक्ष ने पुलिस हिरासत को तीन दिन और बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने दलील दी कि गोयल और चौधरी के मोबाइल फोन से मिले डेटा में इशारों और कोड वाली भाषा में बातचीत थी, और उस बातचीत का मतलब समझने के लिए उनसे हिरासत में और पूछताछ करना जरूरी है।
गोयल और चौधरी के वकीलों ने इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस को मामले की जांच के लिए पहले ही काफी समय दिया जा चुका है और अब हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई जरूरत नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने अभियोजन पक्ष की अर्जी को खारिज कर दिया और आरोपियों को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों की हिरासत 16 जुलाई, गुरुवार को खत्म हो रही है।
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