लैंड फॉर जॉब केस में लालू प्रसाद यादव को SC से बड़ा झटका, FIR रद्द करने की याचिका खारिज

Ankit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चार्जशीट भी फाइल की थी। 

लैंड फॉर जॉब केस में लालू प्रसाद यादव को SC से बड़ा झटका, FIR रद्द करने की याचिका खारिज

लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को एक राहत भी दी है। उन्हें अधीनस्थ अदालत की कार्यवाही में पेशी से छूट दी गई है। बता दें कि लालू प्रसाद यादव ने जमीन के बदले नौकरी मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और चार्जशीट दोनों रद्द करने की मांग की थी। हालांकि कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से ही इनकार कर दिया।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर की बेंच ने कहा कि लालू यादव को ट्रायल कोर्ट में पेश होने की जरूरत नहीं है। लालू यादव की तरफ से तर्क देते हुए कहा गया था कि सीबीआई ने मुकदमा चलाने के लिए कोई कानूनी मंजूरी नहीं ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले को वह निचली अदालत में भी उठा सकते हैं। आरजेडी नेता ने कहा था कि उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है जो कि रद्द होनी चाहिए। इस मामले में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से पहले भी झटका लग चुका है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला 2004 से 2009 तक लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए ग्रुप डी में की गई नियुक्तियों से जुड़ा हुआ है। कथित तौर पर उस समय नौकरी के बदले जमीनें ली गई थीं। इसका आरोप लालू यादव के परिवार पर भी है। इसमें राबड़ी देवी, मीसा भारती और तेजस्वी यादव का भी नाम है।

लालू प्रसाद यादव पर आरोप है कि रेल मंत्री रहतु हुए उन्होंने ग्रुप डी में नौकरियां बांटीं और इसके बदले में लोगों से जमीन ली गई। ज्यादातर नौकरी वाले लोग लालू प्रसाद यादव के निर्वाचन क्षेत्र से ही जुड़े थे। ईडी ने 2023 में कहा था कि इस मामले में लगभग 600 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।

जनवरी 2026 को दिल्ली की राउज अवेन्यू स्पेशल कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए तीखी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में लालू यादव और उनके परिवार के अन्य लोगों ने क्रिमिनल एंटरप्राइज की तरह काम किया है। इस मामले में कोर्ट ने लालू यादव समेत अन्य 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। बता दें कि कई बार चुनाव के वक्त भी यह मुद्दा विरोधी पार्टियों ने उठाया है और इसका नुकसन भी लालू यादव के परिवार को उठाना पड़ा है।

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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