LPG सिलेंडर को लेकर बड़ी राहत, कुल खपत का 60 फीसदी देश में उत्पादन; आयात पर कम हुई निर्भरता
एलपीजी के मोर्चे पर बड़ी राहत की खबर है कि भारत लगातार रसोई गैस के लिए आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अब भार कुल खपत की 60 फीसदी एलपीजी गैस देश में ही उत्पादित कर रहा है।

देश में एलपीजी की किल्लत के बीच एक राहत वाली खबर है। भारत में कुल खपत की लगभग 60 फीसदी रसोई गैस का अब घर में ही उत्पादन होने लगा है ऐसे में आम लोगों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। 40 दिन के इस युद्ध में दुनिया के कई देशों की हालत खराब हो गई। भारत में रसोई गैस की किल्लत जरूर हुई लेकिन ज्यादा दिनों तक अफरा-तफरी का माहौल नहीं रहा। कालाबाजारी पर रोक लगने के बाद लोगों के घरों तक सिलेंडर पहुंचने लगे।
पेट्रोलियम मिनिस्ट्री में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि राज्य सरकारों के सहयोग से अब पीएनजी पाइपलाइन का भी भी काम तेजी से चल रहा है। पिछले पांच सप्ताह में ही लगभग 4.41 लाख ने कस्टर रजिस्टर हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी की कमी नहीं है। कमर्शल सप्लाई बाधित हुई थी जो कि अब 70 फीसदी तक सुधर गई है। इसके अलावा अस्पतालों, शैक्षिक संस्थानों, होटल, ढाबा, फार्मा कंपननियों को प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
लोगों को रसोई गैस वितरकों से सीधे गैस सिलेंडर लेने के लिए हतोत्साहित किये जाने के बाद से देश में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग बढकर लगभग 98 प्रतिशत पहुंच गयी है। पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि देश में विद्युत प्रणाली मज़बूत, विविधीकृत और अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक मांग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है। अप्रैल से तापीय, जलविद्युत, नवीकरणीय, बीईएसएस और पीएसपी परियोजनाओं के कमीशनिंग में तेजी आई है।
98 फीसदी तक ऑनलाइन बुकिंग
देश में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग लगभग 98 प्रतिशत तक बढ़ गई है। जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ देश भर में अभियान जारी है और गुरुवार को लगभग 1.2 लाख छापे मारे गये और 57,000 से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए।
पीएनजी कनेक्शनों को बढावा दिये जाने की मुहिम के तहत 4.05 लाख पीएनजी कनेक्शनों में गैस आपूर्ति शुरू की गयी और लगभग 4.41 लाख अतिरिक्त ग्राहकों ने नए कनेक्शनों के लिए पंजीकरण कराया है।
अधिकारियों ने बताया कि देश की स्थापित क्षमता 531 गीगावाट से अधिक है, जो एक सुविविधीकृत पोर्टफोलियो को दर्शाती है, जिसमें कोयला, नवीकरणीय, जलविद्युत और परमाणु स्रोतों का महत्वपूर्ण योगदान है, तथा गैर-जीवाश्म स्रोत 50 प्रतिशत से अधिक हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षमता को लगभग 5 लाख सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) के मजबूत पारेषण ढांचे और 120 गीगावाट से अधिक अंतर-क्षेत्रीय स्थानांतरण क्षमता का समर्थन प्राप्त है, जिससे क्षेत्रों के बीच विश्वसनीय विद्युत प्रवाह सुनिश्चित होता है।
अधिकारियों ने कहा कि आपूर्ति चुनौतियों से निपटने के लिए तापीय विद्युत संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार सुनिश्चित किया जा रहा है। आयातित कोयला आधारित संयंत्रों को मौजूदा क्षमता का अधिकतम उपयोग करने के लिए पूर्ण रूप से संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा गर्मी के मौसम में लगभग 10,000 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता सुनिश्चित करने के लिए तापीय संयंत्रों के रखरखाव को स्थगित किया जा रहा है। निर्माणाधीन तापीय, जलविद्युत, नवीकरणीय, बीईएसएस और पीएसपी परियोजनाओं के कमीशनिंग में तेजी लाई जा रही है।
सरकार का कहना है कि आयात पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।पिछले दशक में कोई नए गैस आधारित या आयातित कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों की योजना नहीं बनाई गई है, जबकि मौजूदा परिसंपत्तियों को घरेलू ईंधन स्रोतों के अनुरूप किया जा रहा है। राष्ट्रीय विद्युत योजना के अनुसार, कुल स्थापित क्षमता 2031-32 तक लगभग 874 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें गैर-जीवाश्म स्रोतों की ओर महत्वपूर्ण बदलाव होगा।
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लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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