
मैं बंगाल का ओवैसी... बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर का एक और ऐलान; CM ममता को क्यों टेंशन?
Humayun Kabir New Claim: हुमायूं कबीर ने कहा है कि वह बंगाल के ओवैसी हैं और राज्य का मुस्लिम वोट बैंक ममता बनर्जी से छीन लेंगे। लगे हाथ उन्होंने ये दावा भी किया है कि वह AIMIM चीफ के बंगाल में सहयोगी बनेंगे।
Humayun Kabir New Claim: तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा 6 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रेजिनगर में ‘बाबरी मस्जिद’ जैसी एक मस्जिद की नींव रखे जाने के बाद राज्य ही नहीं देश में भी सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इस बीच, हुमायूं कबीर रोज नए-नए बयान देकर सुर्खियों में छाए हुए हैं। पहले उन्होंने जहां कहा था कि वह मस्जिद की नींव रखने के कुछ दिनों बाद तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे देंगे वहीं सोमवार को उन्होंने इससे यू-टर्न ले लिया। अब मंगलवार को उन्होंने एक नया दावा किया है।
हुमायूं कबीर ने कहा है कि वह बंगाल के ओवैसी हैं और राज्य का मुस्लिम वोट बैंक ममता बनर्जी से छीन लेंगे। लगे हाथ उन्होंने ये दावा भी किया है कि वह AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) चीफ के बंगाल में सहयोगी बनेंगे। हालांकि, दिन में ऐसी खबरें आई थीं कि AIMIM ने कबीर का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद कबीर ने आज संवाददाताओं से एक नया दावा किया और कहा, "मैंने ओवैसी से बात की है... ओवैसी ने मुझे वादा किया है कि वह हैदराबाद के ओवैसी हैं और मैं बंगाल का ओवैसी हूं।"
मुस्लिम वोट बैंक पर कब्ज़ा कर लेंगे
हुमायूं कबीर ने ऐलान किया, "मैं 10 दिसंबर को कोलकाता जाऊंगा और अपनी पार्टी की कमेटी बनाऊंगा और 20 दिसंबर के करीब लाखों समर्थकों के साथ अपनी नई पार्टी लॉन्च करूंगा।" उन्होंने दावा किया कि वह तृणमूल के मुस्लिम वोट बैंक पर कब्ज़ा कर लेंगे। बता दें कि बंगाल में करीब 27 फीसदी मुस्लिम हैं। पिछले कुछ चुनावों से इस वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा तृणमूल कांग्रेस को जाता रहा है। कबीर ने रविवार को कहा था, “मैं एक नई पार्टी बनाऊंगा जो मुसलमानों के लिए काम करेगी। मैं 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारूंगा। मैं बंगाल चुनाव में गेम-चेंजर बनूंगा... तृणमूल का मुस्लिम वोट बैंक खत्म कर दूंगा।”
मस्जिद की नींव रखने के बाद हुमायूं कबीर उत्साहित
मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव रखने के बाद हुमायूं कबीर उत्साहित नजर आ रहे हैं। उन्हें राज्य और राज्य से बाहर बड़े पैमाने पर चंदा मिल रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्हें अब तक तीन करोड़ रूपये बतौर चंदा मिल चुका है। वह इसे बड़ी सफलता के तौर पर देख रहे हैं। लिहाजा वह मुस्लिमों के ईर्द-गिर्द अपनी राजनीति को फोकस रखने के फरादे से AIMIM से संपर्क रखने और उसके साथ चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं।
ओवैसी ने इस पर कोई कमेंट नहीं किया है
हालांकि, न तो AIMIM और न ही ओवैसी ने इस पर कोई कमेंट किया है। बंगाल में चुनाव लड़ने की उनकी योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर, ओवैसी ने NDTV से कहा था कि उन्होंने अभी फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा था, “हमें बैठकर फैसला करना होगा, लेकिन अभी मुझे लगता है कि यह बहुत जल्दी है।”
2021 में AIMIM का अनुभव रहा खट्टा
बता दें कि AIMIM ने 2021 में बंगाल में सात सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन कोई भी सीट नहीं जीत पाई थी, जबकि पड़ोसी राज्य बिहार में अपने शानदार नतीजों के बाद माना जा रहा है कि अब ओवैसी बंगाल में भी अच्छे नतीजे की उम्मीद कर रहे हैं। पिछले महीने बिहार में हुए चुनावों में AIMIM ने 2020 में जीती हुई सभी पांच सीटें बचा ली और एक सीट पर दूसरे नंबर पर रही थी। AIMIM ने कुल नौ चुनाव क्षेत्रों में भी नतीजों पर असर डाला है। ऐसे में बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC को चिंता है कि बंगाल में भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है। अगर कबीर और ओवैसी का अलायंस हुआ तो एक तरफ मुस्लिम वोटों का और दूसरी तरफ हिंदू वोटों का धुवीकरण हो सकता है, जिससे ममता बनर्जी की टीएमसी को नुकसान हो सकता है।





