पीएम मोदी को गालियां देने वाली रुचिका को मिला महुआ मोइत्रा का सपोर्ट, बोलीं- सरकार कभी नहीं सीखेगी
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने रुचिका सिंह के सपोर्ट में पोस्ट किया है। उन्होंने एफआईआर को बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है और कहा है कि सरकार कभी नहीं सीखने वाली। रुचिका ने पीएम मोदी को गालियां दी थीं।

नोएडा की रहने वाली 25 साल की रुचिका सिंह के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गालियां देने के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। अब टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी रुचिका को सपोर्ट किया है। मोइत्रा ने जीरो एफआईआर दर्ज किए जाने को बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है। साथ ही, यह भी कहा है कि यह सरकार कभी नहीं सीखेगी।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा, ''25 साल की प्रदर्शनकारी रुचिका सिंह के खिलाफ स्टेट मशीनरी का इस तरह बदले की भावना से इस्तेमाल करना शर्मनाक है। यह सरकार कभी नहीं सीखेगी। किसी को भी उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।'' इससे पहले, सीजेपी ने भी पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया है। सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर कहा था कि रुचिका सिंह के खिलाफ क्रिमिनल मशीनरी का गलत इस्तेमाल मंजूर नहीं है। गाली-गलौज पर क्रिमिनल केस नहीं बनता। लोकसभा के 50 फीसदी सांसदों के खिलाफ क्रिमिनल केस हैं। भाजपा में करीब 100 सांसदों के खिलाफ ऐसे केस हैं। पुलिस अपनी एनर्जी उन पर लगा सकती है, किसी 25 साल की लड़की पर नहीं। युवाओं को परेशान करना तुरंत बंद होना चाहिए।
पुलिस ने गुरुवार को बताया था कि छात्र आंदोलन के दौरान नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में नोएडा में एक युवती के खिलाफ जीरो FIR दर्ज की गई है। यह FIR एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में गाजियाबाद की रहने वाली स्मृति सिंह की शिकायत पर नोएडा के सेक्टर 168 की रहने वाली रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज की गई थी।
एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि 23 जुलाई को आरोपी ने जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और नफरत फैलाने और सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से ऐसा किया गया। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान करना), 353(1) (सार्वजनिक रूप से शरारत करने वाले बयान) और 356(1) (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया।
जंतर-मंतर आंदोलन में की थी गाली-गलौज
एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (नोएडा) मनीषा सिंह ने मामला दर्ज होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा, "गाजियाबाद के एक रहने वाले ने नोएडा के सेक्टर 168 में रहने वाली एक महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि महिला ने जंतर-मंतर पर भारत के प्रधानमंत्री के खिलाफ गाली-गलौज की। यह एक जीरो FIR है और इसे आगे की जांच के लिए नई दिल्ली ट्रांसफर कर दिया जाएगा।" अधिकारियों ने कहा कि जीरो एफआईआर एक ऐसी एफआईआर है, जो किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज की जा सकती है।
बाद में संबंधित थाने में ट्रांसफर होती है एफआईआर
इसके बाद, इसे उस पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया जाता है, जिसके पास मामले की जांच करने का अधिकार होता है। इससे यह पक्का होता है कि अधिकार क्षेत्र के मामलों में बिना किसी देरी के तुरंत शिकायत दर्ज हो जाए। दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन 25 जुलाई को खत्म हुआ। हजारों स्टूडेंट एक्टिविस्ट, इनोवेटर-एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ उनकी 26 दिन की भूख हड़ताल में शामिल हुए। यह नीट पेपर लीक के बाद आंदोलन हुआ था। 20 जुलाई को जोरदार प्रदर्शनों, पुलिस की झड़प और संसद तक एक बड़े मार्च के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।


