
कांग्रेस नेतृत्व से क्यों नाराज हैं शरद पवार-उद्धव ठाकरे? MVA में खींचतान की इनसाइड स्टोरी क्या
कहा जा रहा है कि कांग्रेस के अकेला चुनाव लड़ने के एकतरफा फैसले से शरद पवार और उद्धव ठाकरे खुश नहीं हैं। हालांकि, उनके सामने MVA को बचाने की भी चुनौती है। लिहाजा, कांग्रेस आलाकमान के साथ पर्दे के पीछे बातचीत अभी भी जारी है।
Maharashtra Politics: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिकाकाओं के चुनाव अगले महीने 15 जनवरी को होने हैं लेकिन विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाड़ी (MVA) आपस में ही बंटी नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि MVA के दो घटक दल (शरद पवार की NCP और उद्धव ठाकरे की शिवसेना) तीसरे घटक दल यानी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से नाराज हो चले हैं। इसकी वजह कांग्रेस की वो महत्वाकांक्षा है, जिसके तहत कांग्रेस ने सबसे बड़ी महानगरपालिका या BMC के चुनावों में अकेला उतरने का ऐलान किया है और अब तक उस पर अड़ी हुई है।
कांग्रेस की तरफ से यह ऐलान तब किया गया था, जब ठाकरे बंधुओं (उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे) में नजदीकियां बढ़ी थीं। अब जाकर दोनों भाइयों के बीच BMC चुनाव को लेकर सहमति बन चुकी है, जिस पर बातचीत काफी समय से चल रही थी। हालांकि, सीट बंटवारे का ऐलान बुधवार को होना है लेकिन उससे पहले कांग्रेस को मनाने का दौर शुरू हो चुका है। सेना गुट के सांसद संजय राउत ने कांग्रेस नेताओं से इस बावत बात की है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के एकतरफा फैसले से शरद पवार और उद्धव ठाकरे खुश नहीं हैं। हालांकि, उनके सामने गठबंधन को बचाने की भी चुनौती है। लिहाजा, उन्हें मनाने के लिए कांग्रेस आलाकमान के साथ पर्दे के पीछे बातचीत अभी भी जारी है।
कांग्रेस क्यों भाग रही दूर?
दरअसल, पिछले लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में विपक्ष ने महाविकास अघाड़ी (MVA) के रूप में मिलकर चुनाव लड़ा था, जिसमें शिवसेना (UBT), कांग्रेस और NCP (SP) शामिल थे लेकिन BMC चुनाव की बारी आई तो इस गठबंधन में दरार देखने को मिल रही है क्योंकि शिवसेना (UBT) और NCP (SP) दोनों एक नए पार्टनर, MNS को शामिल करना चाहते हैं, जबकि कांग्रेस नहीं चाहती कि इस गठबंधन में MNS शामिल हो। इसलिए कांग्रेस ने खुद को दूर कर लिया है।
शिवसेना (UBT) और MNS के बीच गठबंधन का ऐलान बाकी
बता दें कि ठाकरे भाइयों ने हाल ही में हाथ मिलाया है। उन्हें राज्य में सत्ताधारी महायुति सरकार के खिलाफ कई मौकों पर एक साथ खड़े देखा गया है। BMC चुनावों की घोषणा के बाद, शिवसेना (UBT) और MNS के बीच गठबंधन की औपचारिक घोषणा होनी बाकी है। दरअसल, उद्धव ठाकरे का मानना है कि वोटों के बंटवारे से बचने के लिए BJP के खिलाफ सामूहिक रूप से चुनाव लड़ना चाहिए और इसी वजह से वह अपने चचेरे भाई राज ठाकरे से हाथ मिलाने को तैयार हुए हैं। उनका मानना है कि ठाकरे परिवार की एकजुटता ही BMC पर कब्जा दिला सकता है लेकिन इस सियासी लड़ाई में उद्धव ठाकरे कांग्रेस को भी साथ रखना चाहते हैं ताकि सत्ता पक्ष MVA में बिखराव का फायदा न उठा सके।

संजय राउत ने राहुल गांधी को किया फोन
सूत्रों ने बताया कि शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने सामूहिक लड़ाई के लिए हाथ मिलाने के मकसद से ही राहुल गांधी से फोन पर बात की है। ताकि BMC चुनाव महाविकास अघाड़ी (MVA) के रूप में लड़ा जा सके। शरद पवार और उद्धव ठाकरे भी इसीलिए कांग्रेस को मनाने में जुटे हैं क्योंकि हाल ही में हुए 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के स्थानीय निकाय चुनावों में, BJP 117 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि महायुति गठबंधन (BJP, शिवसेना और NCP) ने मिलकर 200 का आंकड़ा पार कर लिया है। इस चुनाव को BMC चुनाव से पहले सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है। इसलिए विपक्ष किसी भी सूरत में वोटों के बंटवारे का जोखिम नहीं उठाना चाहता।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




