
58 करोड़ रुपये की ठगी, 10 हजार फर्जी खाते; डिजिटल अरेस्ट के बड़े मामले का भंडोफोड़
यह ठगी अगस्त 2025 में शुरू हुई, जब एक फार्मास्युटिकल कारोबारी और उनकी पत्नी को फोन और वीडियो कॉल से डराया गया। ठगों ने खुद को सीबीआई और ईडी अधिकारी बताया और कहा कि उनके खातों में संदिग्ध धन आया है।
महाराष्ट्र नोडल साइबर पुलिस ने 58 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी मामले में 2,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें 32 गिरफ्तार आरोपियों और 41 वांछित आरोपियों के नाम शामिल हैं। ठगों ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों का रूप धारण कर पीड़ितों को धमकाया। उन्होंने फर्जी कंपनियों के नाम पर जाली केवाईसी दस्तावेज और फेक सिम कार्ड से 10 हजार से अधिक म्यूल बैंक खाते खोले। धन को 13 परतों में गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से विदेश भेजा गया। मास्टरमाइंड कंबोडिया और दुबई से संचालित हो रहे हैं, जिसमें विजय खन्ना प्रमुख हैंडलर है।
यह ठगी अगस्त 2025 में शुरू हुई, जब एक फार्मास्युटिकल कारोबारी और उनकी पत्नी को फोन और वीडियो कॉल से डराया गया। ठगों ने खुद को सीबीआई और ईडी अधिकारी बताया और कहा कि उनके खातों में संदिग्ध धन आया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है। फर्जी वीडियो कॉल में पुलिस स्टेशन, सीबीआई-ईडी ऑफिस और कोर्टरूम के नकली दृश्य दिखाए गए, जहां अभिनेता जज, अधिकारी और वकील बने थे। जांच के बहाने दंपति से उनकी पूरी बचत 58.1 करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर करवा लिए गए। इस दौरान वादा किया गया कि जांच के बाद पैसे लौटा दिए जाएंगे।
जांच में कई नाम आए सामने
जांच में पता चला कि गुजरात के कारोबारी जयेशभाई दपा की फर्म जय भवानी मैकेनिकल को 15.3 करोड़ रुपये मिले, जो आगे ट्रांसफर किए गए। मेघदूत ट्रेडिंग, जैकी एक्सप्लोरर, एसबीवी फाउंडेशन जैसी संस्थाओं के खातों में 1.9 करोड़ रुपये से 2.4 करोड़ रुपये तक आए। देवेंद्रनाथ राउत की सैनाथ एंटरप्राइजेस को 2.1 करोड़ रुपये, जबकि इंडोनेशिया के बैंक खातों में 50 लाख रुपये गए। कुछ धन धार्मिक ट्रस्ट के नाम पर भी ट्रांसफर हुआ। पुलिस ने फंड के ट्रेल को ट्रैक कर कई आरोपियों की भूमिका उजागर की है।





