महाराष्ट्र: 'अगर सत्ता में आने के बाद विचारधारा बदल गई हो तो...' अपनी ही सरकार पर भड़के BJP विधायक
महाराष्ट्र विधानसभा में मॉनसून सत्र के आखिरी दिन भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने सावरकर का नाम लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भारत रत्न के लिए सावरकर के नाम का प्रस्ताव पास करने में देरी कर रही है।

Maharashtra News: महाराष्ट्र की भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को उस वक्त असहजता का सामना करना पड़ा, जब अपने ही विधायक ने वीर सावरकर को लेकर एक सवाल उठा दिया। मॉनसून सत्र के आखिरी दिन भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि आखिर वीर सावरकर को भारत रत्न के लिए नामांकित करने पर देरी क्यों हो रही है? इतना ही नहीं उन्होंने अपना हमला तीखा करते हुए कहा कि सरकार बताए कि क्या सत्ता में आने के बाद उनकी विचारधारा बदल गई है। अगर ऐसा है, तो वह आगे से यह सवाल नहीं उठाएंगे।
महाराष्ट्र विधानसभा के आखिरी दिन शुक्रवार को मुनगंटीवार ने अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को संबोधित करते हुए अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने 5 मार्च को सदन को भरोसा दिलाया था कि उनके (मुनगंटीवार ने मार्च में सावरकर को भारत रत्न के लिए प्रस्ताव दिया था।) प्रस्ताव पर जल्द से जल्द विचार किया जाएगा। लेकिन बजट सत्र निकल गया और अब मॉनसून सत्र भी चला गया। लेकिन इस पर विचार नहीं हुआ है।
वीर सावरकर ने बहुत जुर्म सहे और तकलीफ मत दो- सुधीर मुनगंटीवार
महाराष्ट्र सरकार पर तंज कसते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि सत्ता में आने का मतलब विचारधारा बदलना नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “वीर सावरकर ने अंग्रेजों के हाथों बहुत जुर्म सहे थे। हमें उन्हें भारत रत्न दिलाने में और देरी नहीं करनी चाहिए। देरी करके हम उन्हें तकलीफ दे रहे हैं। हमें केवल एक प्रस्ताव पास करना है। क्या किसी फाइल को इतने लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है? 5 मार्च से लेकर 10 जुलाई तक दो सत्र बीत चुके हैं। लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।”
विचारधारा बदल गई है, तो बता दो फिर नहीं कहूंगा- भाजपा विधायक
भाजपा विधायक ने अपना हमला तीखा करते हुए फडणवीस सरकार पर अप्रत्यक्ष तंज कसा। उन्होंने कहा, "अगर सत्ता में आने के बदा आपकी विचारधारा बदल गई है, तो बता दीजिए। मैं फिर से यह मुद्दा नहीं उठाऊंगा। लेकिन आपके अभी के काम उस विचारधारा से मेल नहीं खाते, जिसे आप मानने का दावा करते हैं।"
उन्होंने कहा, "जब कोई पार्टी सत्ता में आती है, तो उसे अपनी विचारधारा नहीं बदलनी चाहिए। इस मुद्दे पर सरकार को खुलकर अपना रुख बताना चाहिए। मुझे दुख है कि सावरकर की विचारधारा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले एक कार्यकर्ता के तौर पर, मुझे लगता है कि हमारी ही सरकार इस फाइल पर बैठी हुई है। मुझे इसका गहरा अफसोस है। अब से, मैं यह मुद्दा दोबारा कभी नहीं उठाऊंगा।"
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने दी सफाई
भाजपा विधायक के बयान के बाद विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने इस मुद्दे पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कि प्रस्ताव को सदन के सामने इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि बिज़नेस एडवाइज़री कमेटी (BAC) में इस पर चर्चा नहीं हुई थी।
नार्वेकर ने कहा, "दुर्भाग्य से, यह मुद्दा BAC के सामने नहीं आया। मुझे सभी फ्लोर लीडर्स के साथ पहले चर्चा किए बिना सदन के सामने ऐसा प्रस्ताव लाना उचित नहीं लगा।" अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने चेयर को सूचित किया है कि वह इस मामले पर काम कर रही है और सदस्यों को भरोसा दिलाया कि अगले सत्र के दौरान BAC में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
गौरतलब है कि वीर सावरकर को लेकर भारतीय जनता पार्टी हमेशा से ही आगे बढ़कर बात करती रही है। कांग्रेस एक तरफ उनके नाम पर आरोप लगाती है। वहीं भाजपा उन्हें वीर स्वतंत्रता सेनानी मानती है। भाजपा सरकार की तरफ से कई बार इस बात को कहा जा चुका है कि वह सावरकर को भारत रत्न देगी। हालांकि, अभी तक इस पर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।न
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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