एक और पेपर लीक? CJP आंदोलन खत्म होने के चौथे दिन बवाल, सैकड़ों छात्र अटके

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कॉकरोच जनता पार्टी ने पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन किया था। इसके चौथे ही दिन अब महाराष्ट्र में एक परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इसकी जांच जारी है और आयोग का कहना है कि इसके कोई सबूत नहीं हैं

Paper leak
महाराष्ट्र में ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का पेपर लीक होने के आरोप लग रहे हैं। (सांकेतिक तस्वीर) (ANI Photo)

MPSC यानी महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग से जुड़ी एक परीक्षा के पेपर लीक के आरोप लग रहे हैं। खबर है कि इन आरोपों के बाद भर्ती प्रक्रिया को रोक दिया गया है। कहा जा रहा है कि इससे 488 उम्मीदवार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं सका है कि पेपर लीक हुआ था या नहीं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने ऐसे आरोप लगाए थे।

पवार के आरोप हैं कि ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में पेपर लीक हुआ है। अब जब भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई है, तो प्रोविजनल मेरिट लिस्ट में शामिल 488 उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है। हालांकि, आयोग का कहना है कि अब तक इस बात को कोई सबूत नहीं मिले हैं कि पेपर लीक हुआ था। जबकि, पवार ने इस मामले में जांच की मांग की है।

MPSC ने क्या दी सफाई

पीटीआई भाषा के अनुसार, MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने बताया कि एमपीएससी ने 22 मार्च को करीब 31,000 अभ्यर्थियों के लिए औषधि निरीक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की थी और इसके परिणाम 12 जून को घोषित किए गए थे। इसके बाद एक से 12 जुलाई के बीच साक्षात्कार आयोजित किए गए और फिर अनंतिम मेधा सूची प्रकाशित की गई।

उन्होंने कहा, 'आयोग को 21 जुलाई को ईमेल के जरिए परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग मिली थी। हालांकि, शिकायत अस्पष्ट पाई गई, जिसके बाद शिकायतकर्ता से साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा गया। इसके बाद 23 जुलाई को एक और ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भेजे गए थे। इनमें दावा किया गया था कि 22 मार्च को हुई परीक्षा का प्रश्नपत्र 20 मार्च को ही प्रसारित कर दिया गया था।'

सबूत मांगे गए

भीमनवार ने कहा कि शिकायतकर्ताओं से संपर्क कर उनसे साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया। उन्हें एमपीएससी कार्यालय आकर अपना पक्ष रखने के लिए भी कहा गया, लेकिन कोई भी वहां नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा, 'आयोग की साख और गरिमा बनाए रखने के लिए हम प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया में हैं। पुलिस जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।'

CET पर भी उठे सवाल

एजेंसी वार्ता के मुताबिक, महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन के लिए हाल ही में हुए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट 2026 में अंकों को लेकर घोटाला किए जाने का आरोप लगाया है।

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सीईटी 2026 परीक्षा में बड़े पैमाने पर अंक घोटाले को अंजाम दिया गया है क्योंकि 12वीं की परीक्षा में साधारण अंक पाने वाले छात्रों ने रहस्यमयी ढंग से 100 पर्सेंटाइल रैंक हासिल कर ली है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने मेरिट लिस्ट में भारी गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन छात्रों ने 12वीं बोर्ड की परीक्षा 35 से 40 प्रतिशत अंकों के साथ बमुश्किल पास की थी, वे महाराष्ट्र सीईटी में 90 से 100 पर्सेंटाइल लाने में सफल रहे।

सीईटी परीक्षा राज्य स्तर की प्रतियोगी परीक्षा होती है। इसके जरिए छात्रों को स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर के पेशेवर पाठ्यक्रमों में दाखिला मिलता है। विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, फार्मेसी, विधि या कृषि जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अलग-अलग परीक्षा देने के बजाय एक ही कॉमन परीक्षा आयोजित की जाती है।

सीईटी परीक्षा में प्राप्त अंकों या पर्सेंटाइल के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाई जाती है और फिर काउंसलिंग के जरिए छात्रों को उनकी पसंद के कॉलेज और कोर्स में प्रवेश दिया जाता है।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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