महाभारत छोटा लगेगा, संजय कपूर के परिवार में जारी विवाद पर बोला सुप्रीम कोर्ट; 30000 करोड़ का मामला
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी नई अर्जी में रानी कपूर ने एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने अदालत से अपील की है कि जब तक सुलह की प्रक्रिया चल रही है, तब तक प्रिया सचदेव कपूर और अन्य संबंधित लोगों को आरके फैमिली ट्रस्ट के कामकाज में दखल देने से रोका जाए।

दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर और उनकी पत्नी प्रिया कपूर के बीच पारिवारिक ट्रस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विवाद जारी है। इसी बीच शीर्ष न्यायालय ने मामले की तुलना महाभारत से कर दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कह दिया कि इस विवाद के सामने इतना बड़ा युद्ध भी छोटा लग रहा है। खास बात है कि संजय की मां की तरफ से शीर्ष न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है। वहीं, इससे पहले अदालत की तरफ से भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को मामले में मध्यस्थ बनाया गया था।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में 80 वर्षीय रानी की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा, 'हम मैदान में उतर गए हैं। महाभारत भी बहुत छोटी लगेगी। हम इस मामले को देखेंगे।' फिलहाल, कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए 14 मई की तारीख तय की है।
नई याचिका में क्या
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी नई अर्जी में रानी कपूर ने एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने अदालत से अपील की है कि जब तक मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही है, तब तक प्रिया सचदेव कपूर और अन्य संबंधित लोगों को आरके फैमिली ट्रस्ट के कामकाज में दखल देने से रोका जाए। 18 मई को होने वाली बोर्ड मीटिंग पर भी रोक लगाने की मांग की है।
यह मीटिंग रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नोटिस पर बुलाई गई थी, जिसका विवादित संपत्ति के एक बड़े हिस्से पर कब्जा बताया जाता है। याचिका में कहा गया है कि इस मीटिंग का असली मकसद बोर्ड में अपनी पसंद के नए डायरेक्टर नियुक्त करना है।
CJI चंद्रचूड़ बने मध्यस्थ
7 मई, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस चंद्रचूड़ को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया था। न्यायालय ने पक्षों से खुले दिमाग से मध्यस्थता की कार्यवाही में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि वे सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें और विवाद के बारे में सोशल मीडिया पर कुछ नहीं कहें। तब बेंच ने कहा था, ‘यह एक पारिवारिक विवाद है। इसे केवल परिवार के सदस्यों तक ही सीमित रहने दें। इसे मनोरंजन का स्रोत नहीं बनाया जाना चाहिए।’
बेंच ने कहा था, ‘हम मध्यस्थ से प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने की प्रतीक्षा करेंगे और उसके बाद मामले में आगे की कार्यवाही करेंगे। पीठ ने कहा कि मध्यस्थ की फीस और अन्य तौर-तरीके पक्षों से परामर्श करके तय किए जाएंगे। इसने पक्षों को मध्यस्थ से संपर्क करने का निर्देश दिया। पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि मध्यस्थता केवल परिवार के सदस्यों से संबंधित मामलों तक ही सीमित रहेगी।’
शीर्ष अदालत ने 27 अप्रैल को संजय कपूर की मां द्वारा दायर उस मामले में प्रिया कपूर और अन्य से जवाब मांगा था, जिसमें पारिवारिक ट्रस्ट को अमान्य घोषित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने 80 वर्षीय रानी कपूर द्वारा दायर याचिका पर प्रिया कपूर और अन्य को नोटिस जारी किया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित ट्रस्ट 'जाली, मनगढ़ंत और धोखाधड़ी वाले' दस्तावेजों का परिणाम था।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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