Hindi NewsIndia NewsMadras High Court Teaching Bhagavad Gita does not make a Trust religious FCRA registration
भगवद गीता पढ़ाने से कोई ट्रस्ट धार्मिक नहीं हो जाता, HC की दो टूक; FCRA पर केंद्र को बड़ा निर्देश

भगवद गीता पढ़ाने से कोई ट्रस्ट धार्मिक नहीं हो जाता, HC की दो टूक; FCRA पर केंद्र को बड़ा निर्देश

संक्षेप:

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वेदांत एक दार्शनिक प्रणाली है और योग शारीरिक एवं मानसिक कल्याण के लिए एक सार्वभौमिक अभ्यास है। इनकी शिक्षा देना अपने आप में संगठन को धार्मिक नहीं बनाता। पूरा मामला समझिए।

Dec 23, 2025 11:10 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, मदुरै
share Share
Follow Us on

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि भगवद गीता को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के उद्देश्यों के लिए धार्मिक ग्रंथ नहीं माना जा सकता। इसलिए, केवल गीता और योग की शिक्षा देने के आधार पर किसी ट्रस्ट को FCRA पंजीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन की एकल पीठ ने अर्श विद्या परम्परा ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें ट्रस्ट का FCRA पंजीकरण अस्वीकार किया गया था। कोर्ट ने पाया कि अस्वीकृति आदेश अपर्याप्त तर्क और प्रक्रियात्मक खामियों पर आधारित था। कोर्ट ने गृह मंत्रालय को ट्रस्ट के आवेदन पर तीन महीने के अंदर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। यदि फंड ट्रांसफर का कोई ठोस सबूत हो, तो नया विस्तृत नोटिस जारी किया जाए।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

ट्रस्ट की गतिविधियां और आवेदन का इतिहास

अर्श विद्या परम्परा ट्रस्ट की स्थापना 2017 में हुई थी। यह ट्रस्ट कोयंबटूर स्थित अर्श विद्या गुरुकुलम के स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्यों द्वारा स्थापित किया गया है। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य वेदांत, संस्कृत और योग की शिक्षा देना, हठ योग और योग दर्शन का प्रचार करना तथा प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और संरक्षण करना है। यह विश्व भर के छात्रों को पारंपरिक भारतीय ज्ञान का प्रसार करता है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट ने 2021 में FCRA पंजीकरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन यह वर्षों तक लंबित रहा। 2024 और 2025 में गृह मंत्रालय ने स्पष्टीकरण मांगे। जनवरी 2025 में नया आवेदन दाखिल करने के बाद सितंबर 2025 में इसे अस्वीकार कर दिया गया। ट्रस्ट ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

मंत्रालय का मुख्य तर्क: ट्रस्ट 'धार्मिक' लगता है

गृह मंत्रालय ने अस्वीकृति के प्रमुख आधार के रूप में कहा कि ट्रस्ट भगवद गीता, उपनिषद, वेदांत और संस्कृत की शिक्षा पर केंद्रित है, इसलिए यह धार्मिक संगठन प्रतीत होता है। मंत्रालय का मानना था कि ट्रस्ट की गतिविधियां धार्मिक प्रकृति की हैं। कोर्ट ने इस तर्क को विस्तार से जांचा और पूर्व न्यायिक टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा- भगवद गीता धार्मिक पुस्तक नहीं है। यह तो नैतिक विज्ञान है... भगवद गीता को किसी एक धर्म तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह भारतीय सभ्यता का हिस्सा है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वेदांत एक दार्शनिक प्रणाली है और योग शारीरिक एवं मानसिक कल्याण के लिए एक सार्वभौमिक अभ्यास है। इनकी शिक्षा देना अपने आप में संगठन को धार्मिक नहीं बनाता। FCRA की धारा 11 के तहत पंजीकरण अस्वीकार करने से पहले संगठन की गतिविधियों के चरित्र पर निश्चित और स्पष्ट निष्कर्ष होना चाहिए। मंत्रालय ने केवल कहा कि ट्रस्ट धार्मिक प्रतीत होता है, जो अनिश्चित है। कोर्ट ने कहा- अधिकारी को स्पष्ट और निश्चित होना चाहिए, अनिश्चित नहीं।

अन्य आधार भी खारिज

मंत्रालय ने एक अन्य आधार के रूप में कहा कि ट्रस्ट ने एक ट्रस्टी (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) से 9 लाख रुपये का विदेशी अंशदान बिना पूर्व अनुमति के प्राप्त किया, जो FCRA का उल्लंघन है। ट्रस्ट ने गलती स्वीकार की और धारा 41 के तहत अपराध को कंपाउंड (समझौता शुल्क देकर निपटारा) करने का विकल्प चुना। मंत्रालय ने अगस्त 2025 में कंपाउंडिंग प्रक्रिया पूरी कर ली।

कोर्ट ने कहा कि एक बार अपराध कंपाउंड हो जाने के बाद उसे पंजीकरण अस्वीकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। जब अपराध कंपाउंड हो गया, तो उल्लंघन को आवेदक के खिलाफ प्रतिकूल आधार कभी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि मंत्रालय कंपाउंडिंग के बावजूद अस्वीकृति का इरादा रखता था, तो ट्रस्ट को स्पष्ट चेतावनी देनी चाहिए थी कि कंपाउंडिंग केवल अभियोजन से बचाएगा, लेकिन यह दोष की स्वीकृति मानी जाएगी।

अंतिम अस्वीकृति आदेश में मंत्रालय ने यह नया आरोप भी जोड़ा कि ट्रस्ट ने विदेशी योगदान किसी अन्य संस्था को ट्रांसफर किया। कोर्ट ने पाया कि यह आरोप पहले कभी नहीं उठाया गया और न ही ट्रस्ट को इस पर जवाब देने का मौका दिया गया। अदालत ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया।

कोर्ट का अंतिम निर्देश

इन सभी तथ्यों को देखते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय के FCRA विंग को निर्देश दिया कि वह ट्रस्ट के आवेदन पर फिर से विचार करे। यदि मंत्रालय के पास किसी फंड ट्रांसफर के ठोस सबूत हैं, तो वह एक नया और विस्तृत नोटिस जारी करे और ट्रस्ट को जवाब देने का पूरा अवसर दे। कोर्ट ने यह प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने का आदेश दिया है।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar
अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।