BJP आक्रामक पार्टी है, दबंग TMC की जरूरत; बागी मदन मित्रा ने ममता बनर्जी को खूब सुनाया
केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से अपने परिवार को समन भेजे जाने के सवाल पर मदन मित्र ने कहा, ‘अगर मेरी पत्नी और बेटे को एजेंसियों ने बुलाया है तो वे जाएंगे। यदि उन्होंने कोई गलत काम किया होगा तो जांच एजेंसियां अपना काम करेंगी।’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में कलह बढ़ती ही जा रही है। टीएमसी चीफ ममता बनर्जी के करीबी रहे मदन मित्रा भी बागी हो गए हैं। उन्होंने पार्टी के संगठन और 21 जुलाई के शहीद दिवस कार्यक्रम को लेकर तीखी टिप्पणी की। शुक्रवार को मदन मित्रा ने कहा, 'कालीघाट से जिस तरह तृणमूल कांग्रेस चलाई जा रही है, उससे भाजपा के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। पार्टी को एक दबंग और आक्रामक तृणमूल कांग्रेस की जरूरत है।' मदन मित्रा ने यह भी कहा कि शाम छह बजे क्या होगा, इसकी जानकारी पौने छह बजे तक भी कालीघाट स्थित नेतृत्व को नहीं रहती। हम सही रास्ता दिखा रहे हैं। भाजपा एक आक्रामक पार्टी है और हमें उसी तरह उसका मुकाबला करना होगा।
केंद्रीय जांच एजेंसियों की ओर से अपने परिवार को समन भेजे जाने के सवाल पर मदन मित्र ने कहा, 'अगर मेरी पत्नी और बेटे को एजेंसियों ने बुलाया है तो वे जाएंगे। यदि उन्होंने कोई गलत काम किया होगा तो जांच एजेंसियां अपना काम करेंगी। मुझे किसी बात का डर नहीं है।' 21 जुलाई के शहीद दिवस कार्यक्रम पर उन्होंने कहा कि इस बार कार्यक्रम गांधी प्रतिमा के सामने होना चाहिए। गोलीकांड के दिन मैं वहीं मौजूद था। वही असली स्थान है और सभी तृणमूल कार्यकर्ताओं को गांधी प्रतिमा के सामने पहुंचना चाहिए।
ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले गुट में शामिल
इस बीच, अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रुक्मिणी मलिक उर्फ कोयल मलिक के इस्तीफे को लेकर भी चर्चा तेज है। मदन मित्र ने इस पर कहा, 'कोयल किसी से भी मिल सकती हैं।' मदन मित्रा नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले टीएमसी के बागी गुट में शामिल हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि वह अब भी पार्टी में बने हुए हैं। कामरहाटी से विधायक मित्रा ने घोषणा की कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और राज्य संगठनात्मक समितियों से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया।
पिछले कुछ महीनों से ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व को लगातार चुनौती दी है। बागी नेताओं ने एक समानांतर संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की है और पार्टी मुख्यालय पर अपना नियंत्रण होने का दावा किया है जबकि ममता बनर्जी गुट ने इन दावों को खारिज कर दिया है। मदन मित्रा के इस कदम को लेकर अटकलें मंगलवार रात से ही तेज हो गई थीं, जब उन्होंने बागी विधायक संदीपान साहा के एंटली स्थित आवास का दौरा किया था। मित्रा ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद कहा, 'मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं। मैं तृणमूल कांग्रेस का ही हिस्सा हूं।'


