मंदिरों का अन्नदान रुका, छात्रों की रोटियां तक घटा दीं; LPG संकट से नौकरियों पर भी आफत
ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण भारत में LPG गैस की भारी किल्लत हो गई है। सिलेंडर की कीमतें 5000 तक पहुंच गई हैं, कालाबाजारी चरम पर है और देशभर में होटल-रेस्तरां बंद हो रहे हैं। जानें इस संकट से कैसे प्रभावित हो रहा है आम जनजीवन।
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे मौजूदा संघर्ष के कारण देश भर में रसोई गैस (LPG) सिलेंडरों की भारी किल्लत हो गई है। इस संकट ने न सिर्फ आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है, बल्कि रोजगार, व्यापार और रोजमर्रा के जीवन को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। गैस की कमी के चलते कालाबाजारी, चोरी, होटलों द्वारा मनमाने दाम वसूलने और रेस्तरां बंद होने जैसी कई गंभीर घटनाएं सामने आ रही हैं।
कालाबाजारी और व्यापार पर असर
तमिलनाडु में घरेलू LPG सिलेंडर की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी हो रही है। सिलेंडर दोगुने दाम पर बिक रहा है। सामान्य तौर पर 1,400 रुपये में मिलने वाला सिलेंडर अब सीधे 2,800 रुपये में बेचा जा रहा है। गैस संकट के कारण केरल में लगभग 40% और कर्नाटक में 30% छोटे-बड़े भोजनालय अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं, जिससे रोजगार पर भी संकट मंडरा रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नागपुर के पास हिंगना औद्योगिक एस्टेट में 70% से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) ने कमर्शियल LPG पर प्रतिबंध और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण अपने कामकाज में भारी कठिनाइयों की बात कही है। तमिलनाडु में उपभोक्ता हेल्पलाइन पर चाय की दुकानों और होटलों द्वारा गैस की किल्लत का हवाला देकर ग्राहकों से ज्यादा पैसे वसूलने की 70 शिकायतें दर्ज की गई हैं।
चोरी और धार्मिक/सांस्कृतिक आयोजनों पर प्रभाव
संकट इतना गहरा गया है कि तिरुवनंतपुरम के चलाई बाजार इलाके में एक होटल से कमर्शियल गैस सिलेंडर चुराते हुए एक चोर सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ है। सिकंदराबाद के 200 साल पुराने ऐतिहासिक श्री गणेश मंदिर ने गैस की कमी के चलते 'अन्नदान' और 'प्रसादम' का वितरण रोक दिया है।
कोलकाता के मेन्यू से खास व्यंजन गायब
तेज आंच और ज्यादा समय में पकने वाली पारंपरिक बंगाली मिठाइयां (जैसे लवंग लतिका, कालो जाम, पंटुआ, दरबेश) अब दुकानों से नदारद हैं। साथ ही हांडी बिरयानी, मटन रेजाला और दाल मखनी जैसे व्यंजनों को भी रेस्तरां के मेन्यू से हटा दिया गया है। भोपाल के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों (जैसे NLIU और IISER) के साथ-साथ राजस्थान के कोटा स्थित कोचिंग हब में हॉस्टल और मेस संचालकों ने मेन्यू कम कर दिया है। स्नैक्स देना बंद कर दिया गया है और कई जगह खाना पकाने के लिए मजबूरी में कोयले का इस्तेमाल किया जा रहा है।
गुजरात के भरवाड़ समुदाय के एक होटल ने गैस बचाने के लिए छात्रों को परोसी जाने वाली रोटियों की संख्या 700 से घटाकर सीधे 300 कर दी है। कोलकाता के देसून अस्पताल ने मरीजों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए और ईंधन बचाने के लिए अपने मेन्यू को केवल शाकाहारी और अंडे वाले भोजन तक सीमित कर दिया है, क्योंकि मांसाहारी भोजन पकाने में ज्यादा गैस खर्च होती है।
लंबी कतारों से मौत और महंगाई की मार
पंजाब के बरनाला जिले के सेहना गांव में एक बेहद दुखद घटना सामने आई। 60 वर्षीय भूषण कुमार सुबह 5 बजे से 125 लोगों की कतार में 25वें नंबर पर खड़े थे। करीब 7:50 बजे वे अचानक गिर पड़े और अस्पताल ले जाते समय उनकी मृत्यु हो गई। चेन्नई के कई इलाकों में चाय की कीमत 3 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये कर दी गई है। मोगप्पैर और अन्ना नगर जैसे इलाकों में एक गिलास चाय 12 से 15 रुपये और कॉफी 15 से 18 रुपये में मिल रही है। विक्रेताओं का कहना है कि कमर्शियल गैस की कीमत अब 5,000 रुपये तक पहुंच गई है और सबसे बड़ी चिंता यह है कि रिफिल कब मिलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
केरल के शहरों में स्थिति गंभीर
केरल होटल एवं रेस्तरां एसोसिएशन के महासचिव एन. अब्दुल रज्जाक के अनुसार, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरी इलाकों में हालात सबसे खराब हैं। यहाँ के लगभग 1 लाख होटलों में से 40% बंद हो चुके हैं क्योंकि आग से सुरक्षा के नियमों और घनी इमारतों के कारण वहां पारंपरिक जलाऊ लकड़ी का उपयोग करना संभव नहीं है। पंजाब के ढाबे अब मिट्टी के चूल्हों की ओर लौट रहे हैं, जिससे बाजार में लकड़ी और कोयले की मांग तेजी से बढ़ गई है। कई परिवार छोटे तंदूर और मिट्टी के तेल वाले स्टोव अपना रहे हैं।
इंडक्शन कुकटॉप की मांग में भारी उछाल
गैस की अनुपलब्धता के कारण बिजली से चलने वाले उपकरणों की बिक्री बढ़ गई है। कानपुर के 150 से अधिक दुकानों वाले मनीराम बगिया इलेक्ट्रिक मार्केट में इंडक्शन कुकटॉप की मांग आसमान छू रही है।
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