लोकपाल का ‘लग्जरी यू-टर्न’; भारी विरोध के बाद 7 BMW कार खरीद का विवादित टेंडर रद्द
इन कारों को लोकपाल के अध्यक्ष और उसके छह सदस्यों के लिए खरीदा जाना था। फिलहाल लोकपाल के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस ए. एम. खानविलकर हैं। लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं।

भ्रष्टाचार विरोधी संस्था लोकपाल ने अपने एक फैसले पर यू-टर्न ले लिया है और सात लग्ज़री BMW कारें खरीदने से जुड़े अपने विवादित टेंडर को रद्द कर दिया है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि यह फैसला टेंडर जारी होने के करीब दो महीने बाद लिया गया है। इन कारों की कुल कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये बताई गई थी। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लोकपाल के इस कदम की कड़ी आलोचना की थी। उनका कहना था कि भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने वाली संस्था का लग्जरी कारें खरीदना उचित नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार, लोकपाल की पूर्ण पीठ (फुल बेंच) की बैठक में इस टेंडर को रद्द करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद 16 दिसंबर 2025 को इस संबंध में एक संशोधन (कॉरिजेंडम) जारी किया गया। लोकपाल ने 16 अक्टूबर 2025 को सात BMW 3 सीरीज़ 330Li कारों की खरीद के लिए टेंडर जारी किया था।
लोकपाल के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस ए. एम. खानविलकर
इन कारों को लोकपाल के अध्यक्ष और उसके छह सदस्यों के लिए खरीदा जाना था। फिलहाल लोकपाल के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर हैं। लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं। टेंडर में सफेद रंग की BMW 330Li “एम स्पोर्ट” (लॉन्ग व्हीलबेस) कारें मांगी गई थीं। दिल्ली में इन कारों की ऑन-रोड कीमत करीब 5 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
कांग्रेस ने कहा था लोकपाल को “शौक पाल”
इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों ने लोकपाल पर हमला बोला था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने लोकपाल को “शौक पाल” तक कह दिया था। वहीं नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने सुझाव दिया था कि लोकपाल को विदेशी लग्ज़री कारों के बजाय भारत में बनी इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदनी चाहिए।

टेंडर दस्तावेज़ में यह भी कहा गया था कि चुनी गई कंपनी को लोकपाल के ड्राइवरों और कर्मचारियों को BMW कारों के संचालन से जुड़ा प्रशिक्षण देना होगा, जिसमें कक्षा और सड़क पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दोनों शामिल होंगे। अब टेंडर रद्द होने के बाद लोकपाल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले पर आगे विचार करेगा और जनता की भावनाओं का सम्मान करेगा।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




