स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सोमवार को चर्चा; कांग्रेस-भाजपा ने जारी किए व्हिप

Mar 06, 2026 09:46 pm ISTPramod Praveen पीटीआई, नई दिल्ली
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अगर साधारण बहुमत से कोई प्रस्ताव पारित किया जाता है, तो लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 94 सी में इस तरह के कदम का प्रावधान है। अनुच्छेद 96 लोकसभा अध्यक्ष को सदन में अपना बचाव करने की अनुमति देता है।

स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर सोमवार को चर्चा; कांग्रेस-भाजपा ने जारी किए व्हिप

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सोमवार (9 मार्च) को चर्चा होने के आसार हैं। बजट सत्र के दूसरे चरण के लिए संसद की बैठक 9 मार्च से शुरू होगी। लोकसभा सचिवालय ने ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने संबंधी प्रस्ताव सोमवार को कामकाज के लिए सूचीबद्ध कर लिया है। नियमों के अनुसार, चेयर के बुलाने पर सदन के 50 सदस्यों को खड़े होना होगा, तभी नोटिस को स्वीकार किया हुआ माना जाएगा। फिर प्रस्ताव पर चर्चा होगी और वोटिंग होगी। अगर 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता।

सोमवार के एजेंडा पेपर के अनुसार, ये प्रस्ताव ही दिन के काम के तौर पर लिस्टेड एकमात्र आइटम है। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में PTI को बताया था कि प्रस्ताव 9 मार्च को सदन के सामने आएगा। सोमवार को यह नोटिस कांग्रेस के तीन सदस्य - मोहम्मद जावेद, के सुरेश और मल्लू रवि पेश करेंगे। प्रस्तावित प्रस्ताव में स्पीकर के उस व्यवहार पर सवाल उठाया गया है, जिसमें उन्होंने विपक्ष के नेता और दूसरे विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया और "विपक्ष की महिला सांसदों पर बेवजह आरोप लगाए"।

प्रस्ताव में क्या-क्या आरोप

इसमें विपक्षी सांसदों को पूरे सेशन के लिए सस्पेंड करने का भी ज़िक्र किया गया क्योंकि उन्होंने "जनता की चिंता के मुद्दे उठाए और पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ पूरी तरह से आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने वाले रूलिंग पार्टी के सदस्यों को डांटा नहीं।" प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि विपक्ष को लगता है कि बिरला ने सदन के सभी वर्गों का विश्वास जीतने के लिए जरूरी निष्पक्ष रवैया बनाए रखना बंद कर दिया है और अपने पक्षपातपूर्ण रवैये में, वह सदन के सदस्यों के अधिकारों की अनदेखी कर रहे हैं और ऐसे फैसले दे रहे हैं और ऐसे अधिकारों को प्रभावित करने और कमज़ोर करने के लिए सोची-समझी बातें कह रहे हैं।

सत्ताधारी दल का पक्ष लेने के आरोप

प्रस्ताव में कहा गया है, "बिरला सभी विवादित मामलों में सत्ताधारी पार्टी का पक्ष खुले तौर पर रखते हैं और ये सभी काम इस सदन के ठीक से काम करने और लोगों की चिंताओं और शिकायतों को असरदार तरीके से सामने लाने के लिए एक गंभीर खतरा हैं, इसलिए यह तय किया जाता है कि उन्हें उनके पद से हटा दिया जाए।" कांग्रेस ने अपने लोकसभा सदस्यों को व्हिप जारी कर कहा है कि वे 9 से 11 मार्च तक सदन में उपस्थित रहें। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस ने तीन लाइन का व्हिप जारी किया, जिसमें उसके सांसदों के लिये बजट सत्र के दूसरे भाग के पहले तीन दिनों तक निचले सदन में उपस्थित रहना अनिवार्य किया गया है।

अनुच्छेद 96 स्पीकर को अपना बचाव करने की अनुमति देता

यदि सदन द्वारा साधारण बहुमत से कोई प्रस्ताव पारित किया जाता है, तो लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 94 सी में इस तरह के कदम का प्रावधान है। अनुच्छेद 96 लोकसभा अध्यक्ष को सदन में अपना बचाव करने की अनुमति देता है। उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी अपने सभी सांसदों को नौ और दस मार्च को अनिवार्य रूप से सदन में उपस्थित रहने के लिये व्हिप जारी किया है। पार्टी ने शुक्रवार को लोकसभा सांसदों से कहा है कि वह इन दिनों सदन की कार्यवाही के दौरान मौजूद रहें और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में भाग लें।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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