काबा मदीना गाने वालीं सायोनी घोष क्या करेंगी, 18 दिन की मोहलत; बागियों को नोटिस
इन 20 सांसदों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद जून महीने में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा की थी।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने काबा-मदीना गाने वालीं सांसद सायोनी घोष समेत तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उन 20 बागी सांसदों को बड़ी राहत दी है, जिन्होंने TMC तोड़कर 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) का दामन थाम लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ने दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराए जाने की मांग को लेकर ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर याचिकाओं के संबंध में अब इन 20 सांसदों को जवाब देने के लिए 22 सितंबर तक का समय दिया है।
संसद के सूत्रों ने बताया कि NCPI सांसदों द्वारा 26 अगस्त को जारी अध्यक्ष के नोटिस का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने के बाद यह मोहलत दी गई। इससे पहले 26 अगस्त के नोटिस में इन सांसदों से सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया था। स्पीकर बिरला ने TMC नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा इन सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाएं दायर किए जाने के बाद नोटिस जारी किए थे। अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में स्पीकर से इन 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की याचिका
इन 20 सांसदों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद जून महीने में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल होने की घोषणा की थी। बिरला ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 25 अगस्त को अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताए जाने के बाद नोटिस जारी किए थे, जिसमें बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की याचिकाओं पर अध्यक्ष से जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया गया था।
स्पीकर ने पहले दिया था 7 दिन का समय
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने बनर्जी की याचिका पर 20 सांसदों को नोटिस जारी किया था और अध्यक्ष के समक्ष चल रही अयोग्यता की कार्यवाही पर शीघ्रता से कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। अभिषेक बनर्जी ने जून महीने में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अलग-अलग याचिकाएं दायर कर तृणमूल छोड़कर एनसीपीआई के साथ जाने वाले सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी। इसके बाद अध्यक्ष के नोटिस में सांसदों से सात दिन के भीतर अपना जवाब देने को कहा गया था।
सूत्रों ने बताया कि अतिरिक्त समय मिलने से बागी गुट को कुछ राहत मिली है और वह अयोग्य ठहराने की कार्यवाही के कानूनी एवं राजनीतिक प्रभावों पर विचार कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि ये सांसद दलबदल विरोधी प्रावधानों की उनके मामले में प्रयोज्यता और अध्यक्ष के समक्ष रखे जाने वाले तर्कों को लेकर कानूनी राय भी ले रहे हैं।


