तुकाराम मुंढे ने होटल सील कराए, स्कूलों का क्या; बच्चों ने खाया छिपकली मिला भोजन
महाराष्ट्र के एक स्कूल के भोजन में छिपकली मिलने से बवाल मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि भोजन तैयार करते समय छिपकली बर्तन में उतर गई होगी। इसके चलते दो दर्जन से ज्यादा बच्चे बीमार हो गए हैं और पैरेंट्स नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक सरकारी आश्रम स्कूल के खाने में छिपकली मिलने से कम से कम 30 छात्र बीमार हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना मंगलवार को जीवती तालुका के नागराला गांव में अंब्रू नाइक माध्यमिक आश्रम स्कूल में उस समय हुई, जब स्कूल में छात्रों को खाना परोसा गया। खाना खाने के तुरंत बाद कई छात्रों को जी मिचलाने, उल्टी और पेट में तकलीफ की शिकायत हुई। बीमार छात्रों को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्कूल प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि खाना बनाते समय उसमें छिपकली गिर गई होगी, जिससे छात्रों को फूड पॉइजनिंग होने का शक है। सभी छात्रों की हालत स्थिर बताई जा रही है। अधिकारियों ने खाने के नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज दिए हैं और घटना की जांच शुरू कर दी है।
पैरेंट्स भड़क गए
इस घटना के बाद छात्रों के माता-पिता ने इस लापरवाही पर रोष जाहिर किया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने कहा कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही संस्थान में साफ-सफाई और खाने पान सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
तबीयत बिगड़ी
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में बीमार बच्चों को जीवती के ग्रामीण इलाके में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए राजुरा उप जिला अस्पताल ले जाया गया था। अभिभावकों के अलावा स्थानीय लोग भी मामले पर जमकर नाराजगी जता रहे हैं। साथ ही सरकारी स्कूलों में साफ सफाई पर सवाल उठ रहे हैं।
तुकाराम मुंढे का ऐक्शन जारी
रेस्तरां और खाने-पीने से जुड़े कारोबार के खिलाफ की गई कड़ी कार्रवाई को सही ठहराते हुए एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा है कि प्रतिष्ठानों की बहानेबाजी पर नियामक ध्यान नहीं देता, बल्कि 'तथ्यों' के आधार पर कार्रवाई करता है। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के की गई है और इससे भोजन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। मुंढे ने बुधवार को मुंबई प्रेस क्लब द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से कहा, 'मैं प्रतिष्ठानों की बहानेबाजी पर ध्यान नहीं देता। मैं अपने अधिकारियों से तथ्यों पर गौर करने के लिए कहता हूं।'
सख्त कार्रवाई से चर्चा में
एफडीए द्वारा खाने-पीने की जगहों और रेस्तरां के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के कारण चर्चा में रहे हैं। कुछ मामलों में तो इस वजह से कानूनी जांच-पड़ताल भी हुई। ऐसे में एफडीए आयुक्त ने कहा कि खाने-पीने के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई तथ्यों और नियमों के पालन की जरूरतों के आधार पर की गई थी, न कि उनके प्रबंधन द्वारा दी गई सफाई के आधार पर।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खाद्य नियामक अधिक जोखिम वाले प्रतिष्ठानों पर ध्यान दे रहा है और होटलों, रेस्तरां या खाने-पीने के दूसरे कारोबारों के बीच कोई भेदभाव नहीं करता है।
कहां तक पहुंची जांच
एफडीए की कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एजेंसी ने जुलाई के आखिर तक 3,100 से अधिक भोजन कारोबार संचालकों और दवा क्षेत्र में लगभग 100 प्रतिष्ठानों की जांच की, जिसके बाद 165 लाइसेंस निलंबित किए गए और लगभग 450 सुधार नोटिस जारी किए गए।
दुग्ध सुरक्षा के बारे में मुंढे ने कहा कि एफडीए दूध की आपूर्ति श्रृंखला पर डिजिटल रूप से नजर रखने के लिए एक प्रणाली पर काम कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नियमन रोजाना की गतिविधि है और यह प्रमाणित करना मुमकिन नहीं है कि राज्य में मिलने वाला दूध सुरक्षित है या असुरक्षित। सरकारी नौकरी में बने रहने और संभावित तबादले के बारे में पूछे जाने पर मुंढे ने कहा कि उन्हें सरकार पर पूरा भरोसा है।


