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लिंकिंग और मैचिंग पर जोर, मतदाता सूची फ्रीज: चुनाव आयोग ने बताया दूसरे चरण के SIR में क्या है खास

लिंकिंग और मैचिंग पर जोर, मतदाता सूची फ्रीज: चुनाव आयोग ने बताया दूसरे चरण के SIR में क्या है खास

संक्षेप:

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में देशव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 12 राज्यों में मतदाता सूची के दूसरे चरण का SIR शुरू हो रहा है।

Oct 27, 2025 05:09 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में देशव्यापी SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 12 राज्यों में मतदाता सूची के दूसरे चरण का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू हो रहा है। इस प्रक्रिया में मतदाता सूची को अपडेट करना, नए मतदाताओं के नाम जोड़ना और मौजूदा त्रुटियों को दूर करना मुख्य लक्ष्य होगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इन राज्यों में SIR लागू होने के साथ ही आज रात से ही मतदाता सूची को फ्रीज कर दिया जाएगा।

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण संबंधी कार्य 28 अक्टूबर से 3 नवंबर 2025 तक संचालित होंगे। इसके बाद घर-घर सर्वेक्षण का चरण 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025 तक चलेगा। प्रारंभिक मतदाता सूची का जारीकरण 9 दिसंबर 2025 को होगा। दावे व आपत्तियां 9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 तक दर्ज की जा सकेंगी। नोटिस प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की सुनवाई एवं सत्यापन प्रक्रिया 9 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक पूरी की जाएगी। और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 फरवरी 2026 को होगा।

अब तक 8 बार SIR

मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार, आजादी के बाद से 1951 से 2004 तक देश में कुल आठ बार SIR का आयोजन हो चुका है। उन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा समय-समय पर मतदाता सूचियों की गुणवत्ता पर उठाए गए सवालों का जिक्र किया। इस संदर्भ में उन्होंने लिंकिंग और मैचिंग प्रक्रिया पर विशेष बल दिया। इसका मतलब है कि 2004 की वोटर लिस्ट से नामों का मिलान किया जाएगा, और उसके आधार पर परिवार के अन्य सदस्यों को लिंक किया जाएगा। उदाहरणस्वरूप, यदि परिवार के किसी सदस्य का नाम 2004 की सूची में मौजूद है, तो उसी आधार पर बाकी सदस्यों के नाम जोड़े जाएंगे।

SIR है क्या?

चुनाव आयोग द्वारा संचालित यह एक व्यवस्थित प्रक्रिया है, जो मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने के लिए डिजाइन की गई है।

  • 18 वर्ष से अधिक आयु के नए मतदाताओं को सूची में शामिल करना
  • मृत व्यक्तियों या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाना
  • नाम, पता और अन्य विवरणों में हुई त्रुटियों का सुधार
  • बूथ लेवल अधिकारी (BLO) द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म भरवाना
  • राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट BLO की सहायता करते हैं

SIR मतदाता के अनंतिम सूची

यह रिवीजन प्रक्रिया कट-ऑफ डेट के रूप में कार्य करती है। बिहार की 2003 की वोटर लिस्ट को आधार बनाकर SIR तैयार किया गया है। बता दें कि अन्य राज्यों में पिछली SIR 2002-2004 के बीच हुई थी।

SIR जरूरी क्यों?

मुख्य चुनाव आयुक्त ने SIR की आवश्यकता पर जोर देते हुए कई कारण गिनाए। प्रमुख कारणों में लगातार हो रहा पलायन शामिल है, जिससे एक ही व्यक्ति का एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण हो जाता है। इसके अलावा मतदाता सूची में घुसपैठ की समस्या भी बनी हुई है, जिससे SIR के माध्यम से ऐसे लोगों को हटाया जाएगा।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें
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