चुप्पी एक तरह का लालच, ऐसे नहीं बना सकते देश महान; राहुल गांधी का कहां निशाना?
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कोई भी देश लोगों की चुप्पी से महान नहीं बनता है। हमें लालच की संस्कृति को छोड़कर अपने विचारों और अपने मतों को व्यक्त करना होगा। ऐसा करने पर ही राष्ट्र और व्यक्ति महान बनता है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केरल में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अपना अहम मंत्र दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश महान तब तक नहीं बनता, जब तक कि उसके लोग अपने मतों को अपने विचारों को स्वतंत्रता के साथ व्यक्त नहीं करते। उन्होंने कहा कि हमें भी अपने विचारों के लिए संघर्ष करना होगा। लालच की संस्कृति को त्यागकर हमें अपनी आवाज को उठाना होगा।
लोकसभा नेता विपक्ष ने कहा, "पूरे देश में हम ऐसे कई लोगों को देखते हैं, जो किसी बात पर अगर विश्वास भी करते हैं, तब भी उसे कहने का साहस नहीं करते हैं। लेकिन उन्हें समझना होगा कि कोई भी राष्ट्र चुप्पी से महान नहीं बनता है। महान राष्ट्र और महान लोग तब महान बनते हैं, जब वह अपने विचारों और मतों को व्यक्त करते हैं और उनके लिए संघर्ष करते हैं।" राहुल जब यह भाषण दे रहे थे, तब एक दुभाषिया मलयालम भाषा में लोगों को अनुवादित करके उनका भाषण बता रहा था।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने कहा, "चुप्पी की संस्कृति में लालच की भावना छिपी होती है। जैसे कि जब तक मुझे वह मिल रहा है, जिसकी मुझे जरूरत है, तब तक यह मायने नहीं रखता कि आसपास क्या हो रहा है। मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं है। मैं लोगों को अपमानित होते हुए, उनकी हत्या होते हुए, उन्हें मारे जाते हुए देख सकता है। अगर ऐसा है, तो यही लालच की संस्कृति है। हमें इसे बदलना होगा।"
जनता से आज्ञा पालन करवाना चाहते हैं भाजपा, संघ: राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा, संघ को कांग्रेस के बीच बहुत बड़ा अंतर सत्ता के केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण को लेकर है। उन्होंने कहा, “अगर आप भाजपा, आरएसएस और कांग्रेस पार्टी के बीच के अंतर को थोड़ा गहराई से देखें, तो आपको पता चलेगा कि वे सत्ता के केंद्रीकरण के पक्षधर हैं, जबकि हम सत्ता के विकेंद्रीकरण के पक्षधर हैं। वे भारत की जनता से आज्ञापालन चाहते हैं। वे भारत की जनता की आवाज सुनना ही नहीं चाहते।”
हालांकि, राहुल गांधी ने यहां पर किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका यह बयान उन लोगों के लिए माना जा रहा है, जो सरकार के साथ असहमति रखते हैं, लेकिन इसके बाद भी खुलकर अपने विचारों को अभिव्यक्त नहीं करते, क्योंकि कहीं न कहीं उन्हें अपने लाभ के बंद होने या सरकार के निशाने पर आने का डर रहता है।
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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