सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के हाथ पड़ गया AI, ऐसे केस लिख रहे जो हैं ही नहीं; CJI सूर्यकांत भड़के

Feb 17, 2026 01:17 pm ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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सीजेआई ने कहा, 'जस्टिस दीपांकर दत्ता के साथ भी ऐसा कुछ हुआ है। बताए गए सभी उदारहण कभी थे ही नहीं।' जस्टिस नागरत्न ने कहा, 'कुछ सुप्रीम कोर्ट के असली केसों के हवाला दे रहे थे, लेकिन उनके कुछ बताए गए हिस्से फैसले में थे ही नहीं।'

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के हाथ पड़ गया AI, ऐसे केस लिख रहे जो हैं ही नहीं; CJI सूर्यकांत भड़के

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत समेत शीर्ष न्यायालय के कई जजों ने कहा है कि कई वकील ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एआई की मदद ले रहे हैं। इस दौरान न्यायाधीशों ने कहा कि ड्राफ्ट में ऐसे उदाहरण दिए जा रहे हैं, जिनका अस्तित्व ही नहीं है। जानकारों का कहना है कि एआई जजों की जगह नहीं ले सकता, बल्कि सहायक की भूमिका निभा सकता है।

बार एंड बेंच के अनुसार, याचिकाएं तैयार करने के लिए AI के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'हमें हैरान करने वाले बात बताई गई है कि कुछ वकीलों ने ड्राफ्टिंग के लिए एआई का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।' जस्टिस बीवी नागरत्न ने कहा, 'एक केस था मर्सी बनाम मैनकाइंड, जो वजूद में ही नहीं था।'

सीजेआई ने कहा, 'जस्टिस दीपांकर दत्ता के साथ भी ऐसा कुछ हुआ है। बताए गए सभी उदारहण कभी थे ही नहीं।' जस्टिस नागरत्न ने कहा, 'कुछ सुप्रीम कोर्ट के असली केसों के हवाला दे रहे थे, लेकिन उनके कुछ बताए गए हिस्से फैसले में थे ही नहीं।'

एआई जज की जगह नहीं ले सकता, पूर्व जज बोले

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने हाल ही में कहा कि AI न्यायिक प्रणाली में जज की जगह नहीं ले सकता है। उन्होंने कहा कि एआई सिर्फ न्याय प्रणाली में सहायक की भूमिका निभा सकता है। जस्टिस माहेश्वरी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘भारतीय न्याय प्रणाली को बदलने के लिए एआई का इस्तेमाल’ परिचर्चा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्ञान को बढ़ाने और काम में मदद करने का एक सहायक उपकरण है, लेकिन यह इंसानी समझ की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई में स्वतंत्र रूप से सोचने की क्षमता नहीं होती और न ही इसमें मानवीय संवेदना या परिस्थितियों की भावनात्मक समझ है, जो न्याय के लिए जरूरी है।

एआई सिर्फ सहायक टूल के तौर पर काम करे

परिचर्चा के अंत में वक्ताओं ने माना कि मुकदमों के बोझ कम करने और मामलों के त्वरित निपटारे में एआई के इस्तेमाल के तरीकों पर जोर दिया। साथ ही न्यायिक आजादी और कानून के राज में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए। बातचीत में यह आम सहमति दिखी कि एआई को न्यायिक तर्क के विकल्प के बजाय एक सहायक टूल के तौर पर काम करना चाहिए।

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निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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